एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने महाकुंभ में निरंजनी अखाड़ा से दीक्षा ली और अब 'कमला' के नाम से जानी जाएंगी। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उन्हें दीक्षा दी और बताया कि वे सनातन धर्म को गहराई से समझने में लगी हैं।

Maha Kumbh 2025: एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स इन दिनों चर्चा की केंद्र में हैं। महाकुंभ में संन्यास धारण करने वाली पॉवेल जॉब्स सनातन धर्म और आध्यात्म में पूरी तरह से रम चुकी हैं। यूपी सरकार ने बताया कि भारत आईं स्टीव जॉब्स थोड़ी बीमार थीं लेकिन महाकुंभ में स्नान करने के बाद वह पहले से बेहतर हैं और तेजी से रिकवर कर रही हैं। आश्रम के सहयोगियों की मानें तो पॉवेल धर्म को जानने के प्रति बेहद इच्छुक रह रही हैं, वह सनातन धर्म को बारीकी से समझने में लगी हुई हैं।

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निरंजनी अखाड़ा से जुड़ी पॉवेल जॉब्स को मिला नया नाम

महाकुंभ में पहुंची अरबपति स्टीव जॉब्स की पत्नी पॉवेल जॉब्स, यहां निरंजनी अखाड़ा से जुड़ गई हैं। उनको महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने दीक्षा दी है। पॉवेल जॉब्स के गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उनका नामकरण किया है। अब वह पॉवेल जॉब्स नहीं कमला के नाम से पहचानी और जानी जाएंगी। महामंडलेश्वर ने बताया कि कमला, सनातन धर्म के प्रति काफी समर्पित और जानने को इच्छुक हैं। वह किसी प्रकार के इगो से फ्री हैं और पूरी तरह से अपने गुरु के प्रति समर्पित हैं। स्वामी कैलाशानंद ने बताया कि कमला के हर सवाल सनातन धर्म के आसपास ही रहते हैं। वह हर सवाल के जवाब से काफी खुश हो रही हैं और उसे पूरी तरह से एन्जॉय कर रहीं।

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अखाड़ा परिषद ने भी की तारीफ

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के मुखिया महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि पॉवेल जॉब्स की प्यास आध्यात्म के प्रति इतना अधिक है कि वह महाकुंभ तक पहुंच गई हैं। कमला नाम दिया गया है। वह सनातन कल्चर को फॉलो करना शुरू कर दी हैं। सबसे बड़ी बात यह कि वह लो प्रोफाइल रहती हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को एक कार्यक्रम में मैनें डायस के पास उनको बल में बैठने को कहा लेकिन वह पीछे जाकर बैठीं।

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