Ayodhya Sawan mela offering rules: हनुमानगढ़ी मंदिर में अब सिर्फ़ देसी घी के लड्डू चढ़ेंगे। सावन मेले से पहले मंदिर प्रशासन ने ये बड़ा फ़ैसला लिया है। रिफ़ाइंड या डालडा घी पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है।

Hanumangarhi temple pure ghee laddoos: सावन मेला शुरू होने से पहले हनुमानगढ़ी मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब से हनुमानगढ़ी मंदिर में केवल शुद्ध देसी घी से बने लड्डू का ही भोग चढ़ेगा। मंदिर प्रशासन ने व्यापारियों के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार का रिफाइंड या डालडा घी प्रयोग नहीं किया जाएगा।

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बैठक में तय हुए नए नियम

यह अहम निर्णय सोमवार देर शाम अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के आवास पर हुई बैठक में लिया गया। बैठक में हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंतों, व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों और मंदिर प्रशासन की मौजूदगी में लड्डुओं की शुद्धता और पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए कई नए नियम तय किए गए।

देसी घी और शुद्ध बेसन से बने लड्डू ही मान्य

मंदिर प्रशासन ने निर्देश दिया है कि लड्डू केवल शुद्ध देसी घी और चने के बेसन से ही बनाए जाएं। देसी घी की गुणवत्ता भी स्पष्ट रूप से तय की गई है। पतिराम, ज्ञान घी, पराग और अमूल देसी घी जैसे ब्रांड का ही प्रयोग मान्य होगा।

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लड्डू के डिब्बे पर नाम और मोबाइल नंबर अनिवार्य

व्यापारियों को आदेश दिया गया है कि लड्डू के हर डिब्बे पर अपनी दुकान का नाम, पता और मोबाइल नंबर साफ-साफ अंकित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि किस प्रकार के घी और सामग्री का प्रयोग किया गया है।

रिफाइंड या डालडा घी के प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध

प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर किसी व्यापारी ने रिफाइंड या डालडा घी का इस्तेमाल किया या गुणवत्ता के साथ कोई समझौता किया, तो उसके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई व्यापारिक समाज और मंदिर प्रशासन दोनों की ओर से की जाएगी। व्यापारियों ने इस निर्णय पर सहमति जताते हुए कहा है कि वे हनुमानगढ़ी मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सभी ने शुद्ध सामग्री का उपयोग करने और निर्देशों का पालन करने का भरोसा दिलाया।

सावन में भक्तों को मिलेगा शुद्ध भोग

यह निर्णय सावन मेले से ठीक पहले लिया गया है, जब लाखों श्रद्धालु अयोध्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस पहल से भक्तों को शुद्ध और पवित्र प्रसाद मिलेगा और उनकी आस्था को ठेस नहीं पहुंचेगी।

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