मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में एमपीएसपी संस्थाओं की समीक्षा बैठक में ऊर्जा संरक्षण, राष्ट्रहित और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए कर्मयोगी पोर्टल जैसी व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए।

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर Yogi Adityanath ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) की सभी शिक्षण संस्थाओं से वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और राष्ट्रीय चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा बचत आज समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिषद की सभी संस्थाओं के शिक्षक और कर्मचारी प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील का पालन करते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनअभियान बनाएं और विद्यार्थियों के माध्यम से परिवारों तथा समाज को जागरूक करें।

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गोरखनाथ मंदिर में हुई एमपीएसपी संस्थाओं की समीक्षा बैठक

सीएम योगी शनिवार को गोरखनाथ मंदिर स्थित सभाकक्ष में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से वार्षिक रिपोर्ट और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने संस्थाध्यक्षों से कहा कि वे अपनी संस्थाओं को समाज और राष्ट्रहित में समयानुकूल बदलाव का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करेगा तो किसी भी चुनौती का आसानी से सामना किया जा सकेगा।

ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण पर चलाएं जागरूकता अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ईंधन और विदेशी मुद्रा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में शिक्षण संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी पेट्रोलियम पदार्थों के कम उपयोग और बिजली बचाने की आदत अपनाएं। विद्यार्थियों के माध्यम से परिवारों और समाज में भी ऊर्जा संरक्षण का संदेश पहुंचेगा।

शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए बने नया प्लेटफॉर्म

सीएम योगी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के शिक्षकों और कर्मचारियों को समय के अनुसार खुद को अपडेट रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के कर्मयोगी पोर्टल की तर्ज पर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए, जहां कार्मिकों को आधुनिक जरूरतों और नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सके। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अपनाने से कार्य प्रणाली अधिक सरल और प्रभावी बनती है।

हर संस्था का स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था का केवल औपचारिक अस्तित्व नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका स्पष्ट उद्देश्य और लक्ष्य होना जरूरी है। उन्होंने संस्थाध्यक्षों से कहा कि वे अपनी टीम के साथ नवाचार, अनुशासन, समय पालन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करें। उन्होंने कहा कि हर संस्था को अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए और लीक से हटकर कार्य करना चाहिए।

एमपीएसपी की नींव में है राष्ट्र निर्माण की भावना

सीएम योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद केवल शैक्षणिक संस्थाएं संचालित करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि परिषद की स्थापना राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने और राष्ट्रहित में योग्य नागरिक तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। परिषद ने हर परिस्थिति में अपने मूल उद्देश्यों को कायम रखा है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों को बढ़ावा देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने परिषद की सभी संस्थाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान प्रणाली से जुड़ सकेगी। उन्होंने परिसर में स्वच्छता, हरियाली, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

प्रार्थना सभा, राष्ट्रगान और पुस्तकालय को बताया जरूरी

सीएम योगी ने कहा कि विद्यालयों में प्रार्थना सभा, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे सकारात्मक और आध्यात्मिक माहौल बनता है। उन्होंने विद्यालयों में समृद्ध पुस्तकालय, करियर काउंसिलिंग और शिक्षकों-कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण पर भी जोर दिया।

शताब्दी वर्ष 2032 की तैयारियां अभी से शुरू करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 1932 में स्थापित यह परिषद पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक जागरण और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण के उद्देश्य से बनाई गई थी। परिषद के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए संस्थाओं को राष्ट्रीय स्तर का प्रतिमान बनाना होगा।

बैठक में कई प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त मंत्री एवं गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत योगी मिथिलेशनाथ, परिषद के उपाध्यक्ष राजेश मोहन सरकार, वरिष्ठ सदस्य रामजन्म सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, प्रमथनाथ मिश्र, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव और अन्य संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।