झांसी के चिरगांव ब्लॉक की ग्रामीण महिलाओं ने योगी सरकार के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से एलईडी बल्ब निर्माण शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। प्रशिक्षण, बाजार और समर्थन से महिलाएं रोज 150 से अधिक बल्ब बनाकर कमाई कर रही हैं।

गाँव की गलियों में जब बदलाव की रोशनी खुद महिलाओं के हाथों से जगमगाने लगे, तो यह सिर्फ एक पहल नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की नई कहानी बन जाती है। झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक के ग्राम जरियाई की महिलाओं ने ऐसी ही मिसाल पेश की है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से बना ‘जय मां रतनगढ़ वाली महिला स्वयं सहायता समूह’ आज अपने दम पर एलईडी बल्ब बनाकर न केवल कमाई कर रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत भी बन रहा है।

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गांव की महिलाएं बनीं उद्यमी, घर-घर तक पहुंचा रौशनी का कारोबार

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में समूह की 12 महिलाओं ने लगभग 8 महीने पहले एलईडी बल्ब निर्माण की पहल शुरू की। शुरुआत में महिलाओं ने दस हजार रुपये इकठ्ठा कर जरूरी सामान खरीदा और सरकार की ओर से प्रदत्त प्रशिक्षण के बाद उत्पादन शुरू किया।

समूह की अध्यक्ष अंजना ने बताया कि महिलाओं को बल्ब बनाने के लिए रॉ मैटेरियल उपलब्ध कराया जाता है और तैयार बल्ब की मार्केटिंग का काम भी समूह की महिलाएं खुद ही करती हैं। आज यह समूह हर रोज 150 से अधिक बल्ब तैयार करके आसपास के गाँवों में बिक्री कर रहा है।

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सरकारी सहयोग से बढ़ी हिम्मत, तैयार हुए रोजगार के नए अवसर

चिरगांव ब्लॉक की बीएमएम कल्पना ने बताया कि समूह का गठन होने के बाद महिलाओं को संबंधित कार्य का प्रशिक्षण दिलाया गया। सरकार की ओर से प्रदर्शनियों और मेलों में इन उत्पादों की बिक्री के लिए निशुल्क स्टॉल भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे महिलाओं को बाजार तक पहुँचने में कोई कठिनाई नहीं आती।

राज्य सरकार का लक्ष्य सिर्फ प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। इस मॉडल के माध्यम से न केवल महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि परिवार और समाज में उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

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