uttarakhand helicopter tragedy: केदारनाथ धाम की यात्रा पर बिजनौर से गए एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हेलिकॉप्टर हादसे में दादी और पोती की मौत हो गई, जिससे पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया।

kedarnath helicopter crash: उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग जिले के गौरीकुंड क्षेत्र में रविवार को एक भयावह हादसा हुआ। यह कोई आम दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा हादसा था जिसने एक परिवार की खुशियों को गहरे शोक में बदल दिया। बिजनौर से आए एक ही परिवार की दो महिलाएं, एक नानी और उसकी नातिन, इस हादसे की शिकार बन गईं।

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अलग-अलग हेलिकॉप्टर में बैठाया गया था परिवार

बिजनौर के वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल सिंह अपने पूरे परिवार के साथ 13 जून को केदारनाथ यात्रा पर निकले थे। उनकी पत्नी विनोद देवी (66), पोते ईशान, नाती गौरांश और नातिन तुष्टि उनके साथ थे। यात्रा की शुरुआत नगीना से कार द्वारा गुप्तकाशी तक हुई और वहां से हेलिकॉप्टर के जरिए केदारनाथ धाम पहुंचे।

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वापसी के समय जब उन्हें गुप्तकाशी लौटना था, तो हेलीपैड पर यात्रियों को दो समूहों में बांटा गया। धर्मपाल सिंह ने एक साथ यात्रा करने की गुज़ारिश की, लेकिन हेलिकॉप्टर कंपनी के नियमों के चलते परिवार को अलग-अलग हेलिकॉप्टर में भेजा गया।

सुरक्षित पहुंचा पहला हेलिकॉप्टर, दूसरा हुआ दुर्घटनाग्रस्त

धर्मपाल सिंह, ईशान और गौरांश जिस हेलिकॉप्टर में सवार थे, वह बिना किसी बाधा के गुप्तकाशी पहुंच गया। लेकिन विनोद देवी और तुष्टि वाला दूसरा हेलिकॉप्टर नीचे नहीं उतरा, जिससे चिंता बढ़ गई।

कुछ देर बाद सूचना मिली कि हेलिकॉप्टर गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। प्रारंभ में स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बाद में प्रशासन ने पुष्टि की कि पायलट समेत सभी सात लोग इस हादसे में मारे गए।

एक ही झटके में टूटा परिवार का संबल

जैसे ही यह दुखद खबर नगीना और बिजनौर स्थित परिवार तक पहुंची, पूरे घर में मातम पसर गया। विनोद देवी और तुष्टि की मौत ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और अब यह यात्रा उनके जीवन की सबसे कड़वी याद बन गई है।

इस हादसे ने हवाई सुरक्षा और तीर्थयात्रियों के लिए किए जा रहे प्रबंधनों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यात्रियों को परिवार सहित भेजने की व्यवस्था नहीं हो सकती थी? क्या खराब मौसम की पूर्व चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?

केदारनाथ यात्रा को यादगार बनाने की चाह में निकला यह परिवार अब अपने दो सदस्यों को खोकर टूट चुका है। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि तीर्थयात्राओं के प्रबंधन पर एक गंभीर चेतावनी भी है।

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