Akhilesh Yadav On Barabanki Lathicharge: बाराबंकी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और सपा सांसद आनंद भदौरिया ने भी पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए विरोध दर्ज किया।

SRMU Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर छात्र आंदोलनों को लेकर गरमा गई है। बाराबंकी के श्रीरामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

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अखिलेश यादव का हमला: “नाकामी और हताशा की निशानी”

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “बाराबंकी में छात्रों पर लाठीचार्ज, सरकार की नाकामी और हताशा की निशानी है।” अखिलेश ने इस घटना को भाजपा सरकार की छात्र विरोधी नीतियों से जोड़ा और प्रशासन पर सवाल उठाए।

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कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय बोले: “लोकतंत्र का गला घोंटा गया”

इस मामले में कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि बाराबंकी में ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के छात्रों पर पुलिस का बल प्रयोग निंदनीय है। उन्होंने लिखा, “आवाज उठाना छात्रों का हक है। उन पर लाठियां बरसाना लोकतंत्र का गला घोंटना है। कांग्रेस छात्रों की हक की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।”

सपा सांसद आनंद भदौरिया भी उतरे मैदान में

समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने भी लाठीचार्ज का विरोध करते हुए छात्रों के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “छात्र किसी भी संगठन से क्यों न जुड़े हों, लेकिन उन पर पुलिस का ऐसा व्यवहार अनुचित है। यह क्रूर कृत्य निंदनीय है और बीजेपी सरकार का रवैया हमेशा से छात्र विरोधी रहा है।”

पुलिस का पक्ष: “छात्रों ने की थी तोड़फोड़”

वहीं, पुलिस प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ की थी। भीड़ को नियंत्रित करने और स्थिति सामान्य करने के लिए “हल्का बल प्रयोग” करना पड़ा। हालांकि, इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं।

बाराबंकी की इस घटना ने यूपी की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष लगातार योगी सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन अपने कदम को उचित ठहरा रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़कों पर किस तरह गूंजता है।

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