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मोदी-योगी की सीक्रेट मीटिंग! 55 मिनट की मुलाकात में क्या तय हुआ? क्या होंगे बड़े फैसले?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री आवास पर लंबी मुलाकात की। बैठक में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, विकास कार्यों की समीक्षा और 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति पर अहम चर्चा हुई।

दिल्ली में सियासी हलचल तेज, योगी–मोदी की लंबी बैठक ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
दिल्ली की सत्ता गलियारों में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर खास हलचल देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात की। यह बैठक करीब 55 मिनट से अधिक समय तक चली, जिसे राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस लंबी बातचीत ने यूपी की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर 2027 तक पर मंथन
सूत्रों के अनुसार, योगी–मोदी बैठक में उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गहन चर्चा हुई। इसके साथ ही राज्य में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा और आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। माना जा रहा है कि सरकार के कामकाज, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव और जमीनी फीडबैक पर भी प्रधानमंत्री को विस्तृत जानकारी दी गई।
विपक्ष की PDA रणनीति पर भी हुई चर्चा
बैठक में विपक्ष की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति की काट को लेकर भी मंथन हुआ। सूत्र बताते हैं कि सामाजिक समीकरणों, संगठनात्मक मजबूती और सरकार व संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर खास जोर दिया गया। 2027 को ध्यान में रखते हुए चुनावी रोडमैप, बूथ स्तर की रणनीति और संगठन की सक्रियता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
संगठन के शीर्ष नेताओं से भी करेंगे मुलाकात
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में संगठनात्मक मुद्दों, मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित रूपरेखा और आगामी चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा होने की संभावना है।
बढ़ी सियासी सरगर्मी
योगी–मोदी की इस लंबी बैठक को सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह संकेत है कि उत्तर प्रदेश को लेकर भाजपा की रणनीति अब नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलावों को लेकर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं, जिससे यूपी की राजनीति और तेज हो सकती है।
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