योगी सरकार की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई गई। प्रत्येक बेटी को 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता, बच्चों को मासिक मदद, मुफ्त शिक्षा, लैपटॉप और सुरक्षित भविष्य का सहारा मिल रहा है।

कोविड-19 महामारी ने हजारों परिवारों से उनके अपने छीन लिए। कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया, तो कई बेटियां ऐसी रहीं जिनके सामने भविष्य ही सबसे बड़ा सवाल बन गया। ऐसे कठिन समय में उत्तर प्रदेश सरकार ने सिर्फ योजना नहीं बनाई, बल्कि अभिभावक की भूमिका निभाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उन्हें नए जीवन की शुरुआत का सहारा दिया है। सरकार प्रत्येक बेटी के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है, ताकि सम्मान के साथ उनका नया जीवन शुरू हो सके। यह पहल केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए भावनात्मक सुरक्षा का भी संदेश है, जिन्होंने महामारी में अपने सबसे बड़े सहारे खो दिए।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बनी उम्मीद का सहारा

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहायता देना था, जिन्होंने 1 मार्च 2020 के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा की होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील योजना तैयार की। आज यह योजना हजारों परिवारों के लिए उम्मीद और भरोसे का आधार बन चुकी है।

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66 बेटियों की शादी कर निभाई अभिभावक की भूमिका

योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। सरकार ने इन बेटियों के विवाह के लिए प्रति लाभार्थी 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभाने का प्रयास कर रही है। जिन बेटियों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है, उनके लिए यह सहायता केवल धनराशि नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और सुरक्षा का आधार भी है।

10 हजार से अधिक बच्चों को मिल रहा लाभ

वर्तमान समय में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है। योजना की शुरुआत के समय यह संख्या 13,926 थी। समय के साथ कई बच्चे वयस्क हो गए या योजना की निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को लगातार सहायता मिल रही है। यह इस योजना की निरंतरता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

हर महीने 4000 रुपये की आर्थिक सहायता

सरकार बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिमाह 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दे रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने या 12वीं कक्षा पास करने तक—जो पहले हो, प्रदान की जाती है। इससे बच्चों की शिक्षा, भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

8085 लैपटॉप देकर डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा

शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने अब तक 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल में मजबूत बनाना है। आज के समय में तकनीकी शिक्षा बेहद जरूरी है, और यह पहल बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अनाथ बच्चों के लिए निःशुल्क आवास और शिक्षा

योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये वार्षिक अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है।

बच्चों की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की चल-अचल संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को उनका संरक्षक बनाया गया है, ताकि संपत्ति पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा या कानूनी विवाद न हो। यह व्यवस्था बच्चों के दीर्घकालिक भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

युवाओं को भी मिल रही उच्च शिक्षा के लिए सहायता

18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी इस योजना में शामिल किया गया है। जो युवा उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें प्रतिमाह 2,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे युवाओं को अपने सपनों को अधूरा छोड़ने की मजबूरी नहीं होती।

सरकार का लक्ष्य,कोई बच्चा खुद को असहाय न महसूस करे

महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे। आर्थिक सहायता, शिक्षा, सुरक्षित आवास और विवाह सहयोग जैसी सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है।

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