Indian Army Mount Trishul Expedition: भारतीय सेना ने 7,120 मीटर ऊंचे माउंट त्रिशूल पर पर्वतारोहण अभियान शुरू किया है। रुड़की से रवाना हुई टीम कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण रास्तों के बीच चोटी फतह करने का प्रयास करेगी।

Mount Trishul Expedition: भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स ने गढ़वाल हिमालय की चुनौतीपूर्ण चोटियों में शामिल माउंट त्रिशूल पर पर्वतारोहण अभियान शुरू किया है। 7,120 मीटर यानी करीब 23,360 फीट ऊंची इस चोटी को फतह करने के लिए सेना की विशेष टीम को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से रवाना किया गया।

यह अभियान सिर्फ एक पर्वतारोहण चुनौती नहीं है, बल्कि ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में भारतीय सेना के जवानों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती और टीमवर्क की भी परीक्षा लेने वाला है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ शुभारंभ

अभियान के औपचारिक प्रस्थान समारोह में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल थे।

कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स के कई अनुभवी अधिकारी और पर्वतारोहण में उपलब्धियां हासिल कर चुके सैन्यकर्मी भी समारोह का हिस्सा बने। उन्होंने अभियान दल से बातचीत कर उसका उत्साह बढ़ाया और अपने अनुभव साझा किए।

7,120 मीटर की ऊंचाई पर आसान नहीं होगी चुनौती

गढ़वाल हिमालय में स्थित माउंट त्रिशूल की ऊंचाई 7,120 मीटर है। अत्यधिक ऊंचाई, तकनीकी रूप से कठिन चढ़ाई, बर्फीले रास्ते और तेजी से बदलता मौसम इस अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

ऐसे वातावरण में पर्वतारोहियों को न सिर्फ शारीरिक ताकत, बल्कि मानसिक संतुलन और सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता की भी जरूरत होती है। अभियान के दौरान टीम को कठिन भूभाग और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के बीच लगातार तालमेल बनाकर काम करना होगा।

महीनों की तैयारी के बाद मिशन पर निकली टीम

अभियान दल में अनुभवी सैन्य अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। टीम ने अभियान से पहले ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूल खुद को ढालने के लिए विशेष प्रशिक्षण लिया है।

इसके साथ ही जवानों को कठिन शारीरिक प्रशिक्षण, पर्वतारोहण तकनीक और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन से जुड़े जरूरी कौशल का अभ्यास कराया गया। चढ़ाई के दौरान आने वाली तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए भी विस्तृत योजना तैयार की गई है।

ऑपरेशनल ब्रीफिंग में तय हुई रणनीति

अभियान की शुरुआत से पहले टीम लीडर ने विस्तृत प्रस्तुति और ऑपरेशनल ब्रीफिंग दी। इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई के मार्ग, समिट प्रयास की रणनीति और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी गई।

इसके अलावा हिमालय में अचानक बदलने वाले मौसम, कठिन रास्तों और अभियान के दौरान जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाओं से निपटने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।

टीम भावना और अनुशासन पर दिया जोर

समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती की सराहना की। उन्होंने कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स और सैपर्स की पर्वतारोहण एवं साहसिक अभियानों की लंबी परंपरा का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान जवानों में नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति, टीमवर्क और सोच-समझकर जोखिम लेने जैसे गुणों को मजबूत करते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए ये क्षमताएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती हैं।

एक्सपेडिशन फ्लैग सौंपकर किया गया रवाना

समारोह के अंत में अभियान टीम के लीडर को औपचारिक रूप से 'एक्सपेडिशन फ्लैग' सौंपा गया। इसके साथ ही टीम को बेस कैंप की ओर रवाना किया गया, जहां से माउंट त्रिशूल की चढ़ाई का अगला चरण शुरू होगा।

कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स का यह अभियान उसकी गौरवशाली पर्वतारोहण परंपरा को आगे बढ़ाने वाला है। माउंट त्रिशूल की कठिन परिस्थितियों में यह मिशन भारतीय सेना के साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, टीम भावना और पेशेवर उत्कृष्टता की एक और मिसाल पेश करने की कोशिश है।