Uttarakhand Adventure Tourism: उत्तराखंड में माणा पास से औली तक 100 माइल्स हिमालयन अल्ट्रा रन का ऐलान हुआ है। CM धामी की इस पहल से एडवेंचर टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और सीमांत क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हिमालय की बर्फीली चोटियां, कम ऑक्सीजन वाली ऊंचाइयां और बेहद चुनौतीपूर्ण रास्ते… उत्तराखंड अब दुनिया के उन चुनिंदा ठिकानों में अपनी जगह बनाने की तैयारी कर रहा है, जहां एडवेंचर के शौकीन अपनी क्षमता की सबसे कठिन परीक्षा दे सकेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ के गुंजी में आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में हिस्सा लेते हुए अगले साल मई के पहले सप्ताह में 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन आयोजित करने की घोषणा की है।
माणा पास से औली तक 100 माइल्स की चुनौती, जानिए पूरा रूट
प्रस्तावित अल्ट्रा रन लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होकर बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी। इसमें देश-विदेश के धावकों को हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दौड़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, आयोजन की सटीक तारीख, आधिकारिक दूरी और पंजीकरण संबंधी विस्तृत जानकारी अभी घोषित नहीं की गई है। ऐसे में इच्छुक धावकों को आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।
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आदि कैलाश रन में CM धामी ने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह
रविवार, 25 अक्टूबर को गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में मुख्यमंत्री धामी ने भाग लिया और 70 किलोमीटर तथा 42 किलोमीटर की श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य सीमांत उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
वर्ष 2025 में आयोजित पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने भाग लिया था। कार्यक्रम के दौरान रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में मुख्यमंत्री का स्वागत किया। भारतीय सेना, आईटीबीपी और एसएसबी के सहयोग की भी सराहना की गई।
स्थानीय युवाओं को रोजगार, पर्यटन कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार को उम्मीद है कि ऐसे आयोजन सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाएंगे। इससे होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, होटल व्यवसायियों, परिवहन सेवाओं और खानपान से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।
उत्तराखंड में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और माउंटेन साइक्लिंग जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का जोर पर्यटन को स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर है। हालांकि, ऊंचाई पर होने वाली ऐसी प्रतियोगिताओं में मौसम, कम ऑक्सीजन और कठिन रास्तों के कारण विशेष तैयारी जरूरी होगी। आयोजन की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और प्रतिभागियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी रहती हैं।
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