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जानें किस वैज्ञानिक ने भारत में चीता लाने में निभाई बड़ी भूमिका

लंबे इंतजार के बाद भारत में पिछले महीने नामीबिया से चीता लाए गए। बहुत कम लोग जानते हैं कि इन चीतों को भारत लाने में मशहूर जीव वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव विक्रम सिंह झाला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

biologist Yadavendradev Vikramsinh Jhala finds no place in cheetah task force apa
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First Published Oct 6, 2022, 1:50 PM IST

नई दिल्ली। भारतीय वन्य जीव संस्थान के डीन और मशहूर जीव वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव विक्रम सिंह झाला बीते करीब 13 साल से भारत के चीता प्रोजेक्ट को पूरा कराने में सबसे आगे रहे हैं। पिछले महीने नामीबिया से चीतों के पहले जत्थे को भारत भी ला चुके हैं। बता दें कि झाला संरक्षणवादी एमके रंजीत सिंह के तहत  2010 में स्थापित चीता टास्क फोर्स के सदस्य थे। तब से परियोजना की तकनीकी टीम का नेतृत्व वही कर रहे थे। 

बीते 16 सितंबर को जब चीतों का पहला जत्था आखिरकार नामीबिया से रवाना हुआ तो यह झाला ही थे, जो धरती के इस सबसे तेज धावक के साथ मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क ले गए थे। यहां उनको चीतों को रखने वाले बाड़े, जिसे बोमास भी कहते हैं, की देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था। झाला 2009 से लगातार विभिन्न सरकारों में महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी आधार तैयार कर रहे थे। रंजीत सिंह के साथ झाला ने संभावित चीता रिलीज साइटों पर पहली रिपोर्ट तैयार की थी। तब तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने उन्हें 2009 में सर्वेक्षण का काम सौंपा था। जनवरी 2022 में उन्होंने इस पर रिपोर्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही नहीं, झाला ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में वन्यजीव जीवविज्ञानियों के साथ तकनीकी बातचीत का नेतृत्व भी किया था। 

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बता दें कि भारत में चीता 1952 में विलुप्त हो गया था और तभी इस बात का ऐलान भी कर दिया गया। उसके करीब 20  साल बाद कोशिश शुरू कर दी गई कि भारत में फिर दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर आ जाए। दावा यह भी किया जाता है कि यह शानदार जानवर 20 साल तक भी अगर कैद में रहे तो जिंदा रह सकता है। हालांकि, जंगल में इस जानवर की उम्र 14 साल है। एक स्वस्थ्य चीते का वजन औसतन 77 से 143 पाउंड तक हो सकता है। 

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यही नहीं, हर चीते की शारिरिक बनावट बिल्कुल अलग होती है। शरीर के अंग और रीढ़ लंबी छलांग में मदद करती है। यह उन्हें टॉप स्पीड में पहुंचने में भी मददगार साबित होती है। चीते बहुत तेज दौड़ते हैं। दावा तो यहां तक भी किया जाता है कि यह धरती पर सबसे तेज दौड़ने वाला स्तनधारी है। इसकी रफ्तार सिर्फ तीन सेकेंड में ही 64 मील प्रति घंटे तक पहुंच जाती है। चीतों की यह तेज रफ्तार बहुत लंबे समय तक नहीं रह पाती। वह करीब 30 सेकेंड तक इस स्पीड को मेनटेन रख पाता है, इसके बाद रफ्तार कम होने लगती है। मगर इतने में वह अपना काम कर लेता है। 

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