Chandrashekhar Azad Birth Anniversary: चंद्रशेखर आजाद 15 साल की उम्र में ही आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए थे। असहयोग आंदोलन के दौरन जब उन्हें कोर्ट में जज के सामने पेश किया गया तो अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वाधीन और घर का पता जेल बताया। 

ट्रेंडिंग डेस्क। Chandrashekhar Azad Birth Anniversary: चंद्रशेखर आजाद भारत के सबसे क्रांतिकारी और दृढ़निश्चयी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाभरा गांव में हुआ था। उनका मूल नाम चंद्रशेखर तिवारी था, जो बाद में चंद्रशेखर आजाद हो गया। 1921 में जब असहयोग आंदोलन अपने चरम पर था, तब चंद्रशेखर आजाद की उम्र केवल 15 साल थी और वह उस समय पढ़ाई कर रहे थे। मगर देशभक्ति का ऐसा जुनून सवार था कि वे भी आंदोलन में शामिल हो गए। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

इसका नतीजा यह हुआ कि 20 दिसंबर 1921 को उन्हें हिरासत में ले लिया गया। एक हफ्ते बाद जब उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, तो उन्होंने खुद का नाम 'आजाद' यानी स्वतंत्र और पिता का नाम स्वाधीन यानी स्वतंत्रता बताया। यही नहीं, घर का पता उन्होंने जेल बताया। उनके इस जवाब से जज नाराज हुआ और उन्हें कठोर दंड की सजा सुनाई गई। 

कम उम्र में ही अपनी बहादुरी से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए 
जेल से छूटने के बाद चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारी आंदोलन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन यानी एचआरए में शामिल हो गए। इसमें शामिल होकर वे सरकारी राजस्व की लूट के माध्यम से आंदोलन के लिए धन जुटाने लगे। 1925 में हुई काकोरी ट्रेन डकैती में भी वह शामिल रहे। इसके बाद लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लिया। 1928 में लाहौर में जॉन पी. सॉन्डर्स को गोली मारी और 1929 में भारतीय ट्रेन में वायसराय को बम से उड़ाने का प्रयास किया। हालांकि, यह असफल रहा। आइए चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर उनके प्रमुख ध्येय वाक्यों पर एक नजर डालते हैं। 

- अगर आपका खून नहीं रोता है, तो यह सिर्फ पानी है, जो आपकी नसों में बह रहा है। 
- मैं एक ऐसे धर्म में भरोसा करता हूं, जो स्वतंत्रता समानता और भाईचारे का प्रचार करता है। 
- एक विमान जमीन पर हमेशा सुरक्षित रहता है, लेकिन वह जमीन के लिए नहीं बना है। महान ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए जीवन में कुछ सार्थक जोखिम उठाने पड़ते हैं। 
- दूसरों को अपने से बेहतर करते हुए नहीं देखें। हर दिन अपने खुद के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ें, क्योंकि सफलता आपके और सिर्फ आपके बीच की ही लड़ाई है। 
- ऐसी जवानी किसी काम की नहीं, जो अपनी मातृभूमि की खातिर काम नहीं आए। 
- मेरा नाम आजाद, मेरा पिता का नाम स्वाधीन और मेरा घर जेल है। 

हटके में खबरें और भी हैं..

बेटे-बहू के साथ मां भी गई हनीमून पर.. लौटने पर पत्नी ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Job मांगने गया था 'एलियन', कंपनी से मिला ऐसा जवाब... बोला- अब क्या करूं

अरविंद केजरीवाल को राजनीति करते दस साल पहले पूरे हो गए, 10 फोटो में देखिए उनके पुराने रंग-ढंग