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'8 बार मरने के बाद जिंदा हुई..' उस लड़की की कहानी, जो हर बार मौत को मात देकर बच निकलती है

द मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेम्मा ने कोविड की वैक्सीन लेने से मना कर दिया था। कुछ दिनों के बाद जब वह संक्रमित हुई तो हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। 

Cheshire story of Gemma Roberts who survived 8 heart attacks in covid kpn
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Cheshire, First Published Nov 21, 2021, 4:16 PM IST
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इंग्लैंड England. कोरोना संक्रमण (Corona Infection) से बचने के लिए वैक्सीन लगवाने पर जोर किया गया, लेकिन कुछ ऐसी कहानियां सामने आईं, जहां पर लोगों ने वैक्सीन (Vaccine) लगवाने से मना कर दिया। इंग्लैंड के चेशायर (Cheshire) की रहने वाली जेम्मा रॉबर्ट्स (Gemma Roberts) की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। कोरोना से संक्रमित होने से पहले वैक्सीन न लगवाने के लिए दुख जताने वाले जेम्मा को 8 बार कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा। हर बार उन्होंने डॉक्टर से जिंदगी की भीख मांगी और हर बार डॉक्टर उसकी जिंदगी बचाने में सफल रहे।

कोविड की वैक्सीन लगवाने से कर दिया था मना
द मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेम्मा ने कोविड की वैक्सीन लेने से मना कर दिया था। कुछ दिनों के बाद जब वह संक्रमित हुई तो हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। वहां उसे एक या दो बार नहीं बल्कि 8 बार अटैक आया। लेकिन जब वह जिंदा बच गई तो लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील की और  वारिंगटन हॉस्पिटल के डॉक्टर्स और कर्मचारियों का धन्यवाद किया।

जेम्मा 2 महीने तक वेंटिलेटर पर रही
35 साल की जेम्मा की दिक्कत तब शुरू हुई जब अगस्त में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां दो महीने तक वेंटिलेटर पर रखा गया। उन्होंने द मिरर को बताया, मैं डॉक्टरों से बार-बार कहा कि मुझे मरने मत दो। मैं इतना डर गई थी कि मैंने अपनी साथी सोफी को फोन किया। मुझे लग रहा था कि मैं मरने वाली हूं। मुझे बार-बार इस बात का पछतावा हो रहा था कि काश मैंने वैक्सीन लगवा ली होती। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते पहले मैं एक शादी में गई थी। वहीं से मैं संक्रमित हुई।

"मेरी सांस फूलने लगी थी, चलना मुश्किल था"
जेम्मा ने कहा, मैं शुरुआत में थका हुआ और बीमार महसूस किया। जब वॉशरूम गई तो मेरी सांस फूलने लगी। मैंने सोचा कि वे मुझे थोड़ी ऑक्सीजन देंगे और छोड़ देंगे। हॉस्पिटल में मेरा इलाज चल रहा था इसी दौरान मुझे कार्डियक अरेस्ट हुआ। दिल रुक गया। सीपीआर देने पर सांस वापस आई। 2 महीने के अंदर 8 बार कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ा। एक बार तो 10 मिनट तक सांस नहीं चल रही थी। परिजनों ने जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों ने सीपीआर के जरिए जिंदा किया।

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