आर्किटक भेड़िए विलुप्त होने की कगार पर हैं। दुनियाभर में इन्हें बचाने के लिए जद्दोजहद हो रही है, मगर चीन ने हैरतअंगेज कारनामा अंजाम देते हुए लैब में ही एक मादा आर्कटिक भेड़िया तैयार कर दिया और इसका नाम उन्होंने माया रखा है। 

बीजिंग। चीन की एक कंपनी ने सोमवार को चौंकाने वाला खुलासा किया। यह खुलासा आर्कटिक भेड़िए को लेकर था। दरअसल, दुनियाभर में आर्कटिक भेड़िए की प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है। तमाम देश के लिए इन्हें बचाने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। वहीं, चीन ने भी इसके लिए पहल शुरू की थी और गजब की बात ये है कि उसने इसके लिए अभूतपूर्व काम किया। चीन ने आर्कटिक भेड़ियों की क्लोनिंग करके नया भेड़िया पैदा कर दिया है और ऐसा पहली बार हुआ है। 

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चीन ने इस क्लोनिंग आर्कटिक भेड़िए का राज दुनिया के सामने खोला है। हैरान करने वाली बात ये है कि यह नवजात भेड़िया, जो कि मादा है, अब सौ से अधिक दिन का हो चुकी है और किसी स्वस्थ्य आर्कटिक भेड़िए की तरह ही इसका भी विकास हो रहा है। बताया जा रहा है कि इस आर्कटिक भेड़िए का नाम माया रखा गया है और यह बीते 10 जून को पैदा हुई थी। यह हैरतअंगेज कारनामा बीजिंग की जेनेटिक कंपनी साइनोजीन बॉयोटेक्नालॉजी एंड पोलरलैंड ने कर दिखाया है। 

क्लोनिंग का काम देख रहे इस कंपनी के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस सफल क्लोनिंग प्रयास को देखने के बाद हम यह कह सकते हैं कि इसके जरिए दुनियाभर में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु को बचा सकते हैं। कंपनी के महाप्रबंधक मी जिडोन्ग के अनुसार, यह प्रक्रिया दो साल पहले वर्ष 2020 में शुरू हुई थी। इसमें हमने हर्बिन पोलरलैंड की मदद ली थी। यह प्रयास इस विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने को लेकर शुरू किया था, जो अब माया के सामने आने के बाद बेहतर परिणाम और सुखद परिणाम के तौर पर दिख रहा है। 

क्लोनिंग तकनीक के जरिए आर्कटिक भेड़िए का जन्म दुनियाभर में ऐसा अब तक का पहला केस है। उम्मीद है आने वाले समय में यह तकनीक अन्य प्रजातियों के लिए भी सुखद परिणाम लेकर आएगी। इससे बहुत से जीवों का संरक्षण हो सकेगा। बताया जा रहा है कि माया नाम की मादा आर्कटिक भेड़िए को तैयार करने के लिए इसकी कोशिका एक मादा आर्कटिक भेड़िए से ली गई थी। यह मादा भेड़िया कनाडा में थी। इसे बीगल नस्ल की कुतिया के यूट्रस के जरिए सरोगेट कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि बीगल नस्ल को इसलिए सेलेक्ट किया गया, क्योंकि दोनों के जीन्स काफी हद तक मिलते हैं और यही वजह है कि इसमें 137 भ्रूण तैयार हुए, जिसे सात अन्य बीगल नस्ल की ही कुतियों के यूट्रस में ट्रांसफर किया गया। इनमें से सिर्फ एक भ्रूण का विकास हुआ और वो ही बाद में माया बनी। वैज्ञानिकों ने बताया कि माया स्वस्थ्य है और इसके सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

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