गुवाहाटी के एक वृद्धाश्रम में 71 वर्षीय दूल्हे और 65 वर्षीय दुल्हन ने शादी रचाई। बिहू गीत के जरिए पनपा उनका प्यार, अब साथ जीने का मिला सहारा।

उम्र बढ़ने के साथ अकेलापन (Loneliness) सताने लगता है। मन साथी की चाहत करता है। प्यार (love) पनपने के लिए उम्र नहीं, दिल ज़रूरी है। असम के गुवाहाटी (Guwahati) का एक जोड़ा इसका जीता-जागता उदाहरण है। 65 की उम्र पार करने के बाद दोनों के बीच प्यार पनपा। खास बात यह है कि वृद्धाश्रम (old age home) में एक-दूसरे के प्यार में पड़े इस जोड़े ने अब शादी कर ली है। अपनों से दूर वृद्धाश्रम में रहने वालों को अब वृद्धाश्रम में ही दाम्पत्य जीवन का सुख मिल गया है।

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यह अनोखी घटना गुवाहाटी के स्मारक वृद्धाश्रम में घटी। दूल्हे पद्मेश्वर गोवाल की उम्र 71 साल है, जबकि उनकी पत्नी जयप्रभा 65 साल की हैं। पिछले एक साल से दोनों के बीच प्यार चल रहा था। पद्मेश्वर एक घर में काम करते थे। मकान मालिक की मौत के बाद, घर की बहू ने उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दिया। जयप्रभा, भाई की मौत के बाद यहां आई थीं। उनके भतीजे ने उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दिया था। 

प्यार कैसे हुआ? : जयप्रभा जब वृद्धाश्रम आईं, तो उन्हें एक गाना सुनाई दिया। वह बिहू गीत था। उस खूबसूरत आवाज़ पर जयप्रभा मोहित हो गईं। उन्हें पता चला कि यह गाना पद्मेश्वर गा रहे थे। इसी गाने के ज़रिए दोनों करीब आए। पहले दिन से ही दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया। साथ में खुश रहने वाले इस जोड़े को आश्रम के उत्पल हर्षवर्धन ने देखा। उन्हें दोनों के प्यार के बारे में पता चला, तो उन्होंने शादी का प्रस्ताव रखा।

गुवाहाटी में कम उम्र में शादियां होती हैं। ऐसे में इतनी उम्र में शादी करना कितना सही है, यह चिंता और डर उन्हें सता रहा था। लेकिन हर्षवर्धन ने हार नहीं मानी। उन्होंने पद्मेश्वर और जयप्रभा को वृद्धाश्रम में छोड़ने वालों से बात की। उनकी सहमति के बाद शादी हुई।

वृद्धाश्रम में धूमधाम से शादी : एक महीने पहले शादी की रस्में शुरू हुईं। होने वाले पति-पत्नी को एक साथ नहीं रहना चाहिए, इसलिए जयप्रभा को मातृ निवास नामक दूसरे वृद्धाश्रम में भेज दिया गया। मातृ निवास में शादी हुई। दूल्हा पद्मेश्वर, बारात के साथ मातृ निवास जाकर जयप्रभा से शादी की। फिर दोनों अपने आश्रम लौट आए। आश्रम में हुई शादी ने सभी को खुशी दी। सभी ने शादी का आनंद लिया। हल्दी, मेहंदी समेत सभी रस्में पूरी हुईं। शादी में 4000 मेहमान शामिल हुए। सभी के लिए खाने का इंतज़ाम था। जयप्रभा ने मेखला चादर पहनी थी और पद्मेश्वर ने धोती-कुर्ता। जयप्रभा पार्लर जाकर तैयार हुईं। एक घंटे में सभी रस्में पूरी हुईं और दोनों पति-पत्नी बन गए। जयप्रभा अपने पति को बाबू कहती हैं और पद्मेश्वर, जयप्रभा को जान। दोनों के लिए आश्रम में कमरा दिया गया है।