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वो खिलाड़ी जिसकी स्टिक से चिपक जाती थी गेंद, इस तानाशाह ने दिया था ये एक बड़ा ऑफर

Happy Birthday major Dhyan Chand: मेजर ध्यानचंद से हिटलर काफी प्रभावित था। 1936 में बर्लिन में आयोजित ओलंपिक खेल के दौरान मेजर ध्यानचंद और हिटलर की मुलाकात हुई। हिटलर ने उन्हें सेना में बड़ा पद देने  की पेशकश की थी, जिसे ध्यानचंद ने मैंने भारत का नमक खाया है, कहकर ठुकरा दिया। 

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First Published Aug 29, 2022, 7:49 AM IST

ट्रेंडिंग डेस्क। Happy Birthday major Dhyan Chand: हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था। उन्हें आज भी दुनिया के शानदार खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उनका खेल इतना दिलचस्प था कि कहा जाता है कि गेंद उनकी हॉकी की स्टिक से चिपक जाती थी और वे जब तक नहीं चाहते थे, तब तक वह नहीं छूटती थी। भारत में उनका जन्मदिन खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

उनकी मशहूरियत का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि उनसे मिलने और उन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। यही नहीं, तानाशाह हिटलर भी उनका मुरीद था। दुनियाभर में उन्हें हॉकी का जादूगर ध्यानचंद उसी सम्मान से कहा जाता है, जैसे कि फुटबाल में पेले, क्रिकेट में डॉन ब्रैडमैन, मुक्केबाजी में मुहम्मद अली को उनके खेल प्रदर्शन के लिए कहा जाता है। 

हिटलर भी ध्यानचंद के व्यक्तित्व और खेल का मुरीद था 
वैसे तो वह खुद एक जीवित किवंदती थे, मगर उनके बारे में भी बहुत से किस्से आज भी मशहूर हैं। इनमें एक है कि जब उन्होंने तानाशाह हिटलर को भी ना बोलने की जुर्रत दिखाई थी। दरअसल, बात 1936 की है, जब ध्यानचंद ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने के लिए जर्मनी के बर्लिन शहर में पहुंचे थे। वैसे तो उन दिनों ध्यानचंद के खेल के चर्चे पूरी दुनिया में होते थे। उनके खेल के बाकी लोगों जैसे ही हिटलर भी मुरीद था और ध्यानचंद के व्यक्तित्व से भी काफी प्रभावित था। 

'मैंने भारत का नमक खाया है, सिर्फ भारत के लिए खेलूंगा' 
हिटलर ने बर्लिन में ध्यानचंद से मुलाकात की और उन्हें अपनी सेना में बड़े पद का प्रस्ताव दिया। हालांकि, तब ध्यानचंद ने बड़ी विनम्रता से यह कहकर हिटलर को ना बोल दिया कि मैंने भारत का नमक खाया है। मैं भारत के लिए ही खेलूंगा। हिटलर को ना बोलते देख ध्यानचंद तब पूरी दुनिया में सुर्खिया बन गए थे। लोग अब खेल के साथ-साथ उनकी देशभक्ति, बहादुरी और दृढ़ निश्चयता की भी तारीफ करते थे। वैसे, तो ध्यानचंद को लंबे समय से भारत रत्न देने की मांग की जा रही है, मगर अब तक इस पर भारत सरकार का कोई स्पष्ट रूख सामने नहीं आया है। 

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