किसी दूसरे देश जाने के लिए पासपोर्ट एक अनिवार्य दस्तावेज है। इसके बगैर आप दूसरे देश की फ्लाइट में तक नहीं चढ़ सकते। वैसे तो हिब्रू साहित्य के अनुसार कहा जाता है कि ईसा से 450 वर्ष पहले पासपोर्ट की शुरुआत हुई थी। लेकिन यह 1931 में बना यह पासपोर्ट सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहा है। 

ट्रेंडिंग न्यूज. किसी दूसरे देश जाने के लिए पासपोर्ट एक अनिवार्य दस्तावेज है। इसके बगैर आप दूसरे देश की फ्लाइट में तक नहीं चढ़ सकते। वैसे तो हिब्रू साहित्य के अनुसार कहा जाता है कि ईसा से 450 वर्ष पहले पासपोर्ट की शुरुआत हुई थी। लेकिन यह 1931 में बना यह पासपोर्ट सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहा है। पढ़िए आखिर ये मामला क्या है?

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ब्रिटिश-भारतीय पासपोर्ट
यह पासपोर्ट अंशुमन सिंह नामक शख्स ने अपने twitter पर शेयर किया है। इसमें ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा जारी पासपोर्ट की कई तस्वीरें शामिल हैं। यह यादगार पासपोर्ट 1931 में वापस जारी किया गया था। यह पासपोर्ट अंशुमन के दादा का है, तब वह 31 वर्ष के रहे होंगे। तब पासपोर्ट के कवर पर ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक मुहर लगाई जाती थी। यह केन्या की कॉलोनी के साथ-साथ भारत में यात्रा करने की अनुमति देता था। अंशुमन ने twitter पर लिखा-"मेरे दादाजी का 'ब्रिटिश भारतीय पासपोर्ट', जो 1931 में लाहौर में जारी किया गया था। तब उनकी उम्र 31 साल रही होगी।" इस पर कई लोगों के कमेंट्स आए हैं। पढ़िए कुछ...

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450 साल पहले जारी हुआ था पहला पासपोर्ट
अगर पासपोर्ट के इतिहास की बात करें, तो हिब्रू साहित्य में ईसा से तकरीबन साढ़े चार सौ साल पहले का जिक्र मिलता है। यह पासपोर्ट नेहेमियाह नामक एक अधिकारी का था, जिसे फारस के राजा ने जूडिया भेजने के लिए जारी किया था। राजा ने नेहेमियाह को एक रसीद दी थी। इसमें रास्ते में मिलने वाले सरदारों से आग्रह किया गया था कि वे नेहेमियाह की यात्रा में मदद करें। 

वैसे पासपोर्ट की सही शुरुआत करने का क्रेडिट इंग्लैंड के राजा हेनरी पंचम को जाता है। उन्होंने ही पहली बार ऐसे आइडेंटिटी कार्ड की शुरुआत की, जो पासपोर्ट कहलाया।

अगर अभी के भारत के पासपोर्ट की बात करें, तो यहां तीन रंगों के पासपोर्ट बनते हैं। नीले रंग का पासपोर्ट आम जनता के लिए, जबकि सफेद रंग का भी पासपोर्ट आधिकारिक या सरकारी कामकाज के लिए दूसरे देश जाने वाले अधिकारियों के लिए बनता है। मरून रंग का पासपोर्ट भारतीय डिप्लोमेट्स या सीनियर सरकारी अधिकारियों को दिया जाता है।

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