उज्जैन. ज्योतिष ग्रंथों के साथ ही वेदों में भी बताया गया है कि ब्रह्मांड का आधार सूर्य है। सूर्य उर्जा और रचनात्मकता का कारक ग्रह है। सूर्य की ऊर्जा से ही पृथ्वी पर जीवन है। पंचतत्वों में से एक सूर्य का वास्तु शास्त्र में भी बहुत महत्व है। सूर्यदेव को अग्नि का स्वरूप माना गया है, इसलिए वास्तु शास्त्र में सूर्य को बहुत खास माना जाता है।

वास्तु शास्त्र में माना जाता है सूर्य का विशेष महत्व
अंधेरे कमरे में या जहां सूर्य की रोशनी नहीं आती है, उस घर में कीड़े-मकोड़े व सीलन ज्यादा  रहेगी। वहां पर रहने वाले लोगों की सेहत पर विपरीत असर पड़ेगा। अगर सूर्य का प्रकाश घर में आता है तो वहां रहने वाले लोग ऊर्जावान महसूस करेंगे। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा कारक ग्रह कहा गया है। सूर्य की रोशनी जिस घर में पड़ती है वहां के लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है।

कमरे में आ रही सूरज की रोशनी देती है फायदा
घर के जिन कमरों में सूर्य की रोशनी आती है, घर के उन हिस्सों में ऊर्जा ज्यादा होती है। सूर्य की रोशनी के कारण घर की नकारात्मकता खत्म हो जाती है। जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं जाता, वहां रहने वाले लोगों की सेहत अक्सर खराब ही रहती है। अंधेरे कमरे में या जहां सूर्य की रोशनी नहीं आती है, वहां रहने वाले लोगों का आत्मविश्वास कम रहता है। ऐसे लोगों की जीवन शक्ति भी कम हो जाती है। रसोईघर एवं स्नानघर में भी सूर्य का प्रकाश पहुंचे ऐसा इंतजाम करना चाहिए। घर में कृत्रिम रोशनी का उपयोग कम से कम रखना चाहिए।

बेडरूम में हो कम लाइट
बेडरूम में हमेशा कम लाइट होनी चाहिए। शयनकक्ष में तेज रोशनी होगी तो हमारे आराम में बाधा डालेगी और नींद नहीं आएगी। बेडरूम में हमारे सामने लाइट नहीं होना चाहिए। पढ़ाई का कमरा यदि अलग है तो पढ़ते वक्त आंखों पर तेज रोशनी नहीं होना चाहिए, नहीं तो पढ़ाई में दिक्कत होगी और नींद आने लगेगी।