यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चाओं में चल रहे हैं। हालांकि चर्चा है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष के लिए बीजेपी अपने पुराने फॉर्मूले पर चलेगी या फिर बदलाव की बयार देखने को मिलेगी। 

लखनऊ: योगी सरकार 2.0 में स्वतंत्रदेव सिंह के मंत्री बन जाने के बाद बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश जारी है। इस बात को भी लगभत गय माना जा रहा है कि इस पद के लिए नाम के चयन के पीछे आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति ही होगी। ऐसे में कई दावेदारों का नाम काफी चर्चाओं में चल रहा है। जिसके बाद यह भी लगभग तय माना जा रहा है कि आजमगढ़ और रामपुर में उपचुनाव के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। ऐसा इसलिए और भी कहा जा रहा है क्योंकि दो और तीन जुलाई को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक तेलंगाना में होनी है।

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नए प्रदेश अध्यक्ष के सहारे क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने का होगा प्रयास
गौरतलब है कि भाजपा में एक व्यक्ति और एक पद के सिद्धांत का पालन होता है। यूपी में योगी सरकार के सत्ता में वापसी के साथ ही जब स्वतंदेव सिंह मंत्री बने तो उनके स्थान पर किसी और को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला तय हो गया। इस बीच 2024 के चुनावों के मद्देनजर इस पद को पार्टी किसी ऐसे नेता को सौंपना चाहेगी जो जातीय औऱ क्षेत्रीय समीकरणों को साध सके। 

पुराना फॉर्मूला अपनाकर ब्राह्मण पर ही दांव लगाएगी बीजेपी 
यदि इतिहास पर गौर किया जाए तो पार्टी पुराने फॉर्मूले को अपनाते हुए ब्राह्मण को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी। ऐसे में पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम और महेश शर्मा का नाम इस लिस्ट में आगे आता है। यह सभी इस पद के प्रबल दावेदार माने जाते हैं। 

बदलाव की बयार में दलित पर चला जा सकता है दांव 
यूपी की राजनीति के जानकार और पार्टी के ही कुछ लोग मानते हैं कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में बदलाव की बयार दिख सकती है। इसके पीछे का तर्क है कि यूपी विधानसभा के चुनाव में बीजेपी को इस वर्ग का काफी वोट मिला था। बसपा को हुए नुकसान का सीधा फायदा उस दौरान चुनाव में बीजेपी को ही हुआ। जिसके बाद बसपा लोकसभा चुनाव में भी इस वोटबैंक को और मजबूत करने के लिए दलित पर दांव लगा सकती है। इस लिस्ट के नामों की बात की जाए तो इसमें सांसद विनोद सोनकर, विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर, एमएलसी लक्ष्मण आचार्य का नाम आगे चल रहा है।

उपचुनाव के बाद आ सकता है नाम
बताया जा रहा है कि नाम को लेकर शीर्ष नेतृत्व की सहमति पहले ही बन चुकी है। जिसके बाद जैसे ही आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट से उपचुनाव का फैसला सामने आता है उसके बाद ही नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। इसके बाद बीजेपी मिशन 2024 को लेकर जुटेगी। यह कार्य नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में ही होगा। 

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