आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने योग की कई परिभाषाओं को बताते हुए उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं। मोहन भागवत ने कहा कि योग के पेटेंट भारत के नाम पर हो। 

सहारनपुर: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत मोक्षायतन योग संस्थान के 49वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने योग की कई परिभाषाओं को बताने के साथ ही उसकी महत्ता पर भी प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थी। 

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'योग का मतलब ही है झुकना'
इस बीच पद्मश्री योगगुरु भारत भूषण के संस्थान में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि योग का मतलब झुकना है। कलाकार कला की साधना करते हुए परम तत्व तक पहुंचते हैं। मनुष्य के अस्तित्व का सूत्र एक है कि इसे जो समझ लेता है उसका कोई शत्रु नहीं होता और उसे कोई दुख नहीं रहता। ऐसा जीवन जीकर दिखाना हमारा दायित्व होता है। हमें खुद दुखमुक्त होने के साथ ही दुनिया को भी दुखमुक्त करना होता है। हमें ध्यान देना चाहिए हमेशा समुद्र की लहरें होती हैं, लहरों के समुद्र नहीं होते। 

'हर बात के पीछे कोई न कोई सत्य'
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विश्व का स्वरुप सत्य ही है। हर बात के पीछे कोई न कोई सत्य होता है। गीता में भी कहा गया है कि बंधन क्यों होता है। आज का न्यूरो साइंस कहता है कि माया है, वहीं आप समझ पाते हो जिसे आपके साफ्टवेयर में डाला गया है। 

'भारत के नाम पर हो योग का पेटेंट'
कहा गया कि अंदर की व्यवस्था बदल जाएगी तो जैसा दिख रहा वैसा नहीं दिखेगा। इसके पीछे के सत्य को देखना ही योग है। योग वास्तविकता में प्रत्येक कार्य का व्यवस्थित होना है। योग का पेटेंट भारत के नाम पर हो। दुनिया शांति की कल्पना करती है। हालांकि यह कैसे होगा इसको लेकर तरीका दुनिया के पास में नहीं है। उनके पास में सिर्फ भौतिक ज्ञान ही है। एक बार तो वैज्ञानिकों ने कहा था कि भगवान है तो उनको उनकी टेस्ट ट्यूब में आना होगा। अब विज्ञान समझने लगा है कि विज्ञान गणित से प्राप्त होता है। मन से परे बुद्धि, बुद्धि से परे जो है वह सत्य ही है। 

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