स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि बैलेट पेपर की वोटिंग में समाजवादी पार्टी 304 सीटों पर जीती है, जबकि भाजपा मात्र 99 पर। किंतु ईवीएम की गिनती में भाजपा चुनाव जीती, इसका मतलब है कोई न कोई बड़ा खेल हुआ है। गौरतलब है कि इस बार अधिकतर सीटों पर पोस्टल बैलेट गिनती में सपा आगे रही है। माना जा रहा है कि सपा की ओर से सरकार बनने पर पुरानी पेंशन स्कीम लागू किए जाने के वादे की वजह से अधिकतर सरकारी कर्मचारियों ने सपा को वोट किया।

लखनऊ: योगी कैबिनेट में मंत्री पद छोड़कर सपा में गए स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी की हार के लिए एक बार फिर ईवीएम में धांधली का आरोप लगाया है। फाजिलनगर में अपनी सीट जीतने में भी असफल रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा है कि बैलेट पेपर की वोटिंग में समाजवादी पार्टी 300 से अधिक सीटों पर जीती, लेकिन ईवीएम में भाजपा की जीत हुई। उन्होंने दोनों में अंतर बताकर कहा कि कोई ना कोई बड़ा खेल हुआ है।

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि बैलेट पेपर की वोटिंग में समाजवादी पार्टी 304 सीटों पर जीती है, जबकि भाजपा मात्र 99 पर। किंतु ईवीएम की गिनती में भाजपा चुनाव जीती, इसका मतलब है कोई न कोई बड़ा खेल हुआ है। गौरतलब है कि इस बार अधिकतर सीटों पर पोस्टल बैलेट गिनती में सपा आगे रही है। माना जा रहा है कि सपा की ओर से सरकार बनने पर पुरानी पेंशन स्कीम लागू किए जाने के वादे की वजह से अधिकतर सरकारी कर्मचारियों ने सपा को वोट किया।

एग्जिट पोल्स में भाजपा को बढ़त दिखाए जाने के बाद से ही समाजवादी पार्टी ईवीएम में धांधली का आरोप लगा रही है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित पार्टी और गठबंधन के कई नेता ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगा चुके हैं। यूपी में भाजपा गठबंधन को 273 सीटें मिली हैं तो सपा गठबंधन 125 सीटों पर सिमट गया। सपा को जितवाने का दावा करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य भी फाजिलनगर से बड़े अंतर से चुनाव हार गए।

सपा के पक्ष में मुस्लिम गोलबंदी
सीएसडीएस का पोस्ट पोल सर्वे बताता है कि इस चुनाव में मुसलमानों ने लगभग एकतरफा सपा के पक्ष में मतदान किया। सपा को 5 साल पहले 46 फीसदी मुसलमानों ने वोट दिया था तो इस बार उसे अल्पसंख्यक समुदाय के 79 फीसदी वोट मिले। बसपा को 2017 में जहां 19 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे तो इस बार महज 6 फीसदी मुस्लिम हाथी के साथ रहे। भाजपा को भी 2 फीसदी अधिक मुस्लिम वोट मिले। भगवा दल को 5 साल पहले 6 फीसदी मुस्लिम वोट मिले तो इस बार 8 फीसदी अल्पसंख्यकों ने भाजपा में अपना भरोसा जताया।