मूल रूप से झारखंड की रहने वाली प्रीति कुमारी ने एक हाथ से 50181 बार प्रभु श्रीराम नाम लिखकर राम और सीता की बेहद मनमोहक आकृति बनाई है। बता दें कि प्रीति को जन्म से ट्यूमर की बीमारी है, जो अब धीरे-धीरे आधे शरीर में फैल चुकी है। 

वाराणसी: मन में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, हर राह आसान हो जाती है। इस बात को बीएचयू में दृश्यकला संकाय की छात्रा प्रीति कुमारी ने सच कर दिखाया है। बता दें कि अपने हौसले से प्रीति ने अपना नाम वर्ल्ड ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड में दर्ज कराया है। प्रीति कुमारी जन्म से ही ट्यूमर से ग्रसित हैं। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। प्रीति ने कभी अपने हौसले को कम नहीं होने दिया। इसके लिए उन्हें सर्टिफिकेट, मेडल सहित अन्य पुरस्कार भी मिले हैं। प्रीति ने एक हाथ से 50181 बार प्रभु श्रीराम नाम लिखकर राम और सीता की बेहद मनमोहक आकृति बनाई है।

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पेंटिंग के क्षेत्र में हासिल करना चाहती हैं बड़ा मुकाम
इस उपलब्धि को पाकर प्रीति काफी खुश हैं। साथ ही वह बड़े मुकाम को हासिल करने के लिए आगे भी प्रयासरत हैं। बता दें कि मूल रूप से झारखंड निवासी प्रीति ने 2019 में बीएचयू दृश्यकला संकाय में बीएफए यानी बैचलर आफ फाइन आर्ट्स में एडमिशन लिया था। प्रीति ने बताया कि उन्हें शुरू से ही पेंटिंग के क्षेत्र में कुछ कर गुजरने की चाहत रही। इसी दिशा में वह निरंतर प्रयास करती रहीं। प्रीति के पिता दिनेश प्रसाद मंडल रेलवे में इंजीनियर हैं और उनकी माता सुनीता देवी हाउसवाईफ हैं। दो भाई और दो बहनों में दूसरे नंबर की प्रीति का कहना है कि वह बीएचयू में पढ़ाई के साथ ही कला के क्षेत्र में भी निरंतर प्रयासरत रही हैं। वह अब तक कई अवार्ड पा चुकी पूनम राय से भी मार्गदर्शन लेती रहती हैं।

आधे शरीर में फैली ट्यूमर की बीमारी
प्रीति ने बताया कि पढ़ाई के बाद खाली समय में वह इस मिशन को पूरा किया करती थीं। वह अलग-अलग दिनों में काम करके करीब 11 घंटो में 50181 बार प्रभु श्री राम का नाम लिखकर आकृति बनाई है। प्रीति ने कहा कि उन्हें बचपन से बाएं हाथ में ट्य़ूमर की बीमारी थी। जिसका 4 से 5 बार ऑपरेशन किया जा चुका है। वहीं उनके बाएं हाथ की उंगली भी काटनी पड़ी थी। उनका बायां हाथ बिल्कुल भी काम नहीं करता है। फिलहाल उनका दाहिना हाथ ही प्रीति का सहारा है। प्रीति का कहना है कि आधे शरीर में उनके यह बीमारी फैल चुकी है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी अब दूर नहीं हो सकती है। इसलिए प्रीति ने ठान लिया है कि उन्हें इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करना है।

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