कम ही लोगों ने ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में सुना होगा, जहां पूरे स्टाफ में सिर्फ महिलाएं ही हों।

हटके डेस्क। आपने लेडीज स्पेशल ट्रेनें तो जरूर देखी होंगी, लेकिन कम ही लोगों ने ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में सुना होगा, जहां पूरे स्टाफ में सिर्फ महिलाएं ही हों। जी हां, यह एक खास ही बात है। भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई का माटुंगा रेलवे स्टेशन ऐसा ही है जो पूरी तरह लेडीज स्पेशल है। यह भारत का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां टिकट चेकर्स से लेकर बुकिंग क्लर्क और स्टेशन मास्टर तक महिलाएं हैं। जबकि आम तौर पर रेलवे में महिला स्टाफ ज्यादा नहीं मिलती। कम ही ऐसी महिलाएं दिखाई पड़ती हैं जो टीटीई या टीसी के रूप में ट्रेन में चलती हैं। ज्यादातर महिला स्टाफ ऐसे पदों पर हैं जिनका काम किसी न किसी विभाग में डेस्क पर बैठने का है। लेकिन सेंट्रल रेलवे ने मुंबई के उपनगर माटुंगा के रेलवे स्टेशन में पूरा स्टाफ महिलाओं का ही रखने का फैसला किया। यह अपने आप में अनोखी ही बात है।

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आरपीएफ स्टाफ में भी सिर्फ महिलाएं
माटुंगा रेलवे स्टेशन पर टीटीई, बुकिंग क्लर्क, स्टेशन मास्टर और दूसरा सारा स्टाफ महिलाओं का तो है ही, खास बात यह है कि यहां आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) में भी सिर्फ महिलाएं ही हैं। बता दें कि इस स्टेशन में सिर्फ महिला स्टाफ की बहाली का फैसला साल 2017 में लिया गया था। तब यहां ममता कुलकर्णी स्टेशन मास्टर के रूप में बहाल हुईं। उनका कहना था कि रेलवे में अपने 25 साल के करियर के दौरान एक ऐसे स्टेशन पर काम करने का उनका अनुभव बहुत ही बेहतरीन रहा, जहां सारा स्टाफ ही महिलाओं का है। ममता कुलकर्णी का कहना था कि उन्होंने इसके बारे में सोचा तक नहीं था कि कोई ऐसा रेलवे स्टेशन भी हो सकता है, जहां एक भी मेल स्टाफ न हो।

सबसे बेहतर तरीके से डील करती हैं महिलाएं
यहां पैसेंजर्स का कहना है कि महिला स्टाफ का व्यवहार सबके साथ बहुत ही बढ़िया होता है और वे अपना काम बखूबी करती हैं। इस स्टेशन पर काम करने वाली महिलाकर्मियों का भी कहना है कि उन्हें यहां किसी तरह की कोई परेशानी नही होती। रात के समय में काम करने में भी उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं होती, क्योंकि स्टेशन पर आरपीएफ के साथ ही बाहर भी पुलिस मौजूद रहती है। 

क्या कहा जनरल मैनेजर ने
सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर डी के शर्मा का कहना था कि यह महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। बता दें कि एक रेलवे स्टेशन को सिर्फ महिला स्टाफ ही संचालित करे, यह आइडिया देने वालों में एक वे भी थे। आज इस रेलवे स्टेशन की चर्चा देश ही नहीं, विदेशों तक में भी हो रही है।