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Afghanistan बन रहा बच्चों का कब्रगाह, 6 माह में हुई हिंसा में कम से कम 460 मासूमों की मौत

यूनिसेफ (UNICEF)की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में दशकों से जारी युद्ध की वजह से हजारों लोगों की जिंदगी यहां प्रभावित हुई है। 

Afghanistan becoming graveyard for children, UNICEF reports said 460 children died in violence
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Kabul, First Published Nov 7, 2021, 10:36 AM IST
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काबुल। अफगानिस्तान (Afghanistan) में शिया (Shiites)मुसलमानों-महिलाओं (Women) के बाद सबसे अधिक कत्लेआम बच्चों का हुआ है। बच्चों के लिए कब्रगाह (graveyard) बन चुके इस मुल्क में पिछले छह महीने में पांच सौ के आसपास बच्चों को मारा गया है। यूनिसेफ की रिपोर्ट की मानें तो अफगानिस्तान में हुई हिंसा में इस साल के शुरूआती छह महीने में कम से कम 460 बच्चों की मौत हो गई है। 

यूनिसेफ (UNICEF)की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में दशकों से जारी युद्ध की वजह से हजारों लोगों की जिंदगी यहां प्रभावित हुई है। यूनिसेफ के कम्यूनिकेशन प्रमुख सामंता मोर्ट ने कहा, 'इस साल अब तक विस्फोट में मारे गये बच्चों की संख्या को लेकर हम काफी गंभीर हैं। बच्चों की मौत काफी दुखद है। यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई सालों से अफगानिस्तान में बच्चे गरीबी और कुपोषण से संघर्ष कर रहे हैं।

अफगानिस्तान शिया मुसलमानों का भी कब्रगाह

अफगानिस्तान मुसलमानों का भी कब्रगाह बनता जा रहा है। 8 अक्टूबर को कुंदुज में एक शिया मस्जिद पर आत्मघाती हमला हुआ। इस हमले में 70 से अधिक लोग मारे गए और 150 से अधिक लोग घायल हो गए। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासन ने ली। हमलावर की पहचान मुहम्मद अल उइगरी के रूप में हुआ।
बता दें कि काबुल पर तालिबान के कब्जे से पहले तक तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी से जुड़े उइगर और तालिबान के बीच बेहतर रिश्ते रहे हैं। लेकिन चीन के तालिबान से बेहतर रिश्ते होने के बाद अब अफगानिस्तान के उइगर आईएस-के से जुड़ रहे। 

चीन खौफ खाता रहा है उइगर चरमपंथियों से

चीन 2014 से अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट से जुड़े उइगर चरमपंथियों से खौफ खाता है। चूंकि अब तक चीन, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे देशों से दूर ही रहा है ऐसे में इस्लामिक स्टेट को बीजिंग से कोई खास खतरा नहीं महसूस हुआ है। लेकिन बदले हुए हालात में इस्लामिक स्टेट के लिए अफगानिस्तान में बड़ा खतरा नजर आ रहा है।

हालांकि, पहले इस्लामिक स्टेट अपने प्रतिद्वंदी अल कायदा की तुलना में उइगरों की भर्ती करने में बहुत सफल नहीं रहे हैं। लेकिन तालिबान और चीन की दोस्ती को देखते हुए इस्लामिक स्टेट और उइगर चरमपंथियों को अधिक खतरा महसूस हो रहा है। माना जा रहा है कि इस्लामिक स्टेट और उइगर दोनों मिलकर चीन को निशाना बना सकते हैं।

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