पाकिस्तान की आईएसआई ने अपने शीर्ष अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने और ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई करने की बात कही है।

नई दिल्ली। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) खुलकर बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को बढ़ा रही है। इसने ढाका में अपने चार टॉप अधिकारियों को भेजा है। इससे भारत की चिंता बढ़ गई है। इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत अपने आस-पास के इलाकों में हो रही घटनाओं पर बहुत करीबी नजर रख रहा है, खासकर उन पर जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डाल रहे हैं। जरूरत पड़ी तो "उचित कार्रवाई" की जाएगी।

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ISI के महानिदेशक मेजर जनरल शाहिद आमिर अफसर और अन्य सीनियर अधिकारी बांग्लादेश गए हैं। यह दौरा बांग्लादेशी की सेना के अधिकारियों के पाकिस्तान आने और सेना, वायु सेना व नौसेना प्रमुखों से मुलाकात करने के बाद हुआ है।

बांग्लादेश से छह सदस्यों वाला प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान आया था। इसका नेतृत्व बांग्लादेशी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कमरुल हसन ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय रावलपिंडी में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने बातचीत की। बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल 13 जनवरी से 18 जनवरी तक पाकिस्तान में रहा।

21 जनवरी को रावलपिंडी ने गुप्त रूप से ISI अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा। ये अधिकारी दुबई के रास्ते अमीरात एयरलाइंस की फ्लाइट से ढाका पहुंचे। ISI टीम को बांग्लादेश में कई सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया है। इन्हें बांग्लादेश की सैन्य क्षमताओं और तैयारियों के बारे में बताया गया है।

शेख हसीना ने बांग्लादेश में रोकी थी ISI की गतिविधियां

बता दें कि पिछले साल बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का पतन हो गया था। इसके बाद से बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच नजदीकी तेजी से बढ़ रही है। शेख हसीना प्रधानमंत्री थीं तब उन्होंने बांग्लादेश में ISI की गतिविधियों पर लगाम लगाए रखा। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार बांग्लादेश में है। यह पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत कर रही है।

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