बांग्लादेश की पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला ने दावा किया कि ढाका भारत विरोधी और अलगाववादी ताकतों को पनाह देकर नॉर्थ-ईस्ट के सेवन सिस्टर्स राज्यों को भारत से अलग करने में मदद कर सकता है। बता दें कि नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में कई ऐसे ग्रुप एक्टिव हैं।

नई दिल्ली। बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने चेतावनी देते हुए कहा कि ढाका भारत के दुश्मनों और अलगाववादी गुटों को पनाह देकर सेवन सिस्टर्स (नॉर्थ-ईस्ट के 7 राज्य) को अलग करने में मदद कर सकता है। इन सात राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। इनमें से चार राज्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम बांग्लादेश के साथ जमीन साझा करते हैं।

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भारत विरोधी ताकतों को पनाह देने की धमकी

ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में एक सभा को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, हम बांग्लादेश में अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतों को पनाह देंगे और फिर सेवन सिस्टर्स स्टेट को भारत से अलग कर देंगे। अब्दुल्ला की इस बात पर वहां मौजूद भीड़ ने तालियां बजाईं। बता दें कि भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर में काम करने वाले अलगाववादी समूहों पर बांग्लादेश को पनाहगाह, ट्रांजिट रूट और लॉजिस्टिक्स बेस के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाता रहा है।

त्रिपुरा में कई अलगाववादी ग्रुप सक्रिय

त्रिपुरा के मामले में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) जैसे अलगाववादी ग्रुप्स को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बार-बार बांग्लादेश में मौजूद कैंपों और हैंडलर्स से जोड़ा। अधिकारियों ने बताया कि हमलों के बाद कैडर सुरक्षा बलों से बचने के लिए बांग्लादेश चले जाते थे और वहीं ट्रेनिंग और हथियारों की खरीद होती थी।

बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन भारत को कर रहे प्रभावित

बांग्लादेश ने भारत से जुड़े इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क को भी पनाह दी थी। हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) और बाद में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे ग्रुप्स को भारतीय एजेंसियों ने उनकी सीमा पार मौजूदगी और पूर्वी भारत को प्रभावित करने वाले कट्टरपंथ और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए चिह्नित किया था। 2009 में शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद यह स्थिति काफी बदल गई, जब ढाका ने भारत को निशाना बनाने वाले विद्रोही गुटों पर लगातार कार्रवाई शुरू की। हालांकि, शेख हसीना के तख्तापलट के बाद चरमपंथी संगठन फिर मजबूत हो रहे हैं।