चीनी अदालत ने तिब्बती लेखक और शिक्षक गो शेरब ग्यात्सो को बौद्ध धर्म गुरु और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रति वफादारी दिखाने के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई है।

बीजिंग। तिब्बती लोगों पर चीन की सरकार (Chinese Government) का अत्याचार जारी है। तिब्बत में बसने वाले लोगों पर चीन की सरकार ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके विरोध में उठने वाली हर आवाज को दबा दिया जाता है। एक ऐसा ही मामला फिर प्रकाश में आया है। 

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रेडियो फ्री एशिया (Radio Free Asia) ने जानकारी दी है कि चीनी अदालत ने तिब्बती लेखक और शिक्षक गो शेरब ग्यात्सो को बौद्ध धर्म गुरु और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रति वफादारी दिखाने के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई है। ग्यात्सो ने चीनी शासन के तहत रहने वाले तिब्बतियों पर लगे प्रतिबंधों पर किताबें और लेख लिखे थे। उनके खिलाफ कोर्ट में गुप्त ट्रायल किया गया। कोर्ट ने जिन आरोपों पर उन्हें दोषी ठहराया है उसके बारे में जानकारी भी नहीं दी गई है। ग्यासो सिचुआन के नगाबा तिब्बती स्वायत्त प्रान्त में स्थित कीर्ति मठ के भिक्षु भी थे।

नहीं दी गई आरोपों की जानकारी
खबर है कि ग्यात्सो को जल्द ही तिब्बत की क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा के पास एक जेल में ले जाया जाएगा। ग्यात्सो के बारे में बताया जाता है कि वह एक खुले विचारों वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने तिब्बती भाषा, धर्म और संस्कृति के संरक्षण की वकालत की। उन्होंने चीनी शासन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए किताबें लिखी। उनके द्वारा किए जा रहे ये काम चीनी सरकार को नागवार गुजरे। 

बता दें कि 46 साल के गो शेरब ग्यास्तो को 26 अक्टूबर 2020 को सिचुआन की राजधानी चेंगदू में चीनी सरकार के एजेंटों ने हिरासत में लिया था। ग्यात्सो को चीनी सरकार द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला मानवाधिकार संगठनों ने बड़े जोर-शोर से उठाया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के पत्र के जवाब में चीनी सरकार ने कहा था कि ग्यात्सो को अलगाव को उकसाने के संदेह पर कानून के अनुसार आपराधिक हिरासत में रखा गया है।

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