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तालिबान का नया फरमान- 'काबुल अटैक पीड़ितों के लिए नहीं लिया जाएगा महिलाओं का खून', ट्विट के बाद आया भूचाल

तालिबान का एक नया फरमान फिर से सुर्खियों में है जिसमें तालिबान यह कहता है कि काबुल अटैक के पीड़ितों की जान बचाने के लिए महिलाओं का खून नहीं लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया है। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। 
 

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First Published Oct 1, 2022, 5:36 PM IST

Dont Take Blood From Women. तालिबान का एक नया फरमान फिर से सुर्खियों में है जिसमें तालिबान यह कहता है कि काबुल अटैक के पीड़ितों की जान बचाने के लिए महिलाओं का खून नहीं लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया है। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। 

वीडियो हुआ वायरल
एक वायरल वीडियो में यह दिख रहा है कि कुछ महिलाओं को तालिबान ने ब्लड डोनेट करने से रोक दिया है। यह महिलाएं उन पीड़ितों की जान बचाने के लिए खून देने पहुंची जो काबुस ब्लास्ट में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। टोरोंटो में रहने वाली पत्रकार बिलाल सरवरी ने लिखा कि तालिबान ने उन महिलाओं को वापस भेज दिया है जो काबुल अटैक के पीड़ितों की जान बचाने के लिए खून देने को इकट्ठा हुईं थीं। तालिबान ने कहा कि वे महिलाओं के खून को स्वीकार नहीं करेंगे। महिलाएं यह कहती हुई दिख रही हैं कि उनके खून में भला कौन सी कमी है, जिसके लिए उन्हें रोका जा रहा है। 

 

पत्रकार ने किया ट्विट
टोरोंटो बेस्ड पत्रकार बिलाल सरवरी ने फिर ट्विट किया है कि तालिबान यह कोशिश कर रहा है कि पीड़ितों की संख्या कैसे छिपाई जाए। ताबिबान देश के सिविलियंस की जान न बचा पाने के फेल्योर को छिपाने की कोशिश कर रहा है। बिलाल का कहना है कि तालिबान लोकल अथॉरिटीज के आंकड़े को छिपा रहा है और मीडिया को पीड़ितों का आंकड़ा कम बता रहा है। उन्होंने तालिबान पर आरोप लगाया कि देश के नागरिकों की जान बचाने में असफल है और वह आंकड़े छिपाकर अलग कहानी बता रहा है। लोकल अथॉरिटी का कहना है तालिबान सही आंकड़े छिपाने की कोशिश कर रहा है कि क्योंकि पीड़ितों की संख्या उससे दोगुना है जो तालिबान बता रहा है। 

50 से ज्यादा लोग मिसिंग
काज एजुकेशनल सेंटर के टीचर अकील घसेमी ने अफगानिस्तान इंटरनेशनल के साथ एक इंटरव्यू में कहा हमने कई पैरेंट्स से बात की है जिसके बाद यह कहा जा सकता है कि अभी भी 50 से ज्यादा लोग मीसिंग हैं। अकील ने कहा कि शुक्रवार शाम 5 बजे तक 35 से ज्यादा शवों को दफनाया जा चुका है। इसमें 18 साल तक की उम्र वाली 32 लड़कियां हैं। यह क्लेम लंदन बेस्ड मीडिया आउटलेट्स अफगानिस्तान इंटरनेशनल वे ट्विट किया है।

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