हाल ही में अमेरिका के कुछ सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों का असर देखने को मिला, जहां यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कानून प्रवर्तन के प्रति छात्रों के गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

इजरायल-हमास युद्ध। इजरायल हमास युद्ध का असर व्यापक रूप से दुनिया के हर कोने में देखने को मिल रहा है। इसके चलते बीते कई महीनों से लोग दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, अब ये सड़कों से निकलकर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पहुंच चुका है। हाल ही में अमेरिका के कुछ सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों का असर देखने को मिला, जहां यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कानून प्रवर्तन के प्रति छात्रों के गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यहां बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और कक्षाएं बंद हो गईं। इस दौरान अब तक 133 लोगों को गिरफ्तार किया गया और अदालत के सम्मन जारी करने के बाद रिहा कर दिया गया

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न्यूयॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी हाल के समय में फिलीस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शन का गढ़ रहा है। यहां प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यूनिवर्सिटी से ऐसे लोगों को बाहर निकाला जाए, जो इजरायल के रंगभेद, नरसंहार और फिलिस्तीन में कब्जे से फायदा उठा रही है। वे लोग इजरायल -हमास युद्ध और गाजा में आने वाले मानवीय संकट से नाराज हैं। दूसरी तरफ से इजरायली समर्थकों का कहना है कि वो परिसर की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। यहां यहूदी विरोधी घटनाएं बढ़ती जा रही है। इस पर उन्होंने तर्क दिया है कि परिसर डराने-धमकाने और नफरत फैलाने वाले भाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

विरोध प्रदर्शन में कई यहूदी छात्र भी शामिल

कोलंबिया के पब्लिक इश्यू के उपाध्यक्ष बेन चांग ने सोमवार (22 अप्रैल) संवाददाताओं से कहते हैं- छात्रों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन उन्हें परिसर के जीवन को बाधित करने या परेशान करने और डराने-धमकाने की अनुमति नहीं है।"हम उन चिंताओं पर कार्रवाई कर रहे हैं, जो हम अपने यहूदी छात्रों से सुन रहे हैं।" गाजा सॉलिडेरिटी एन्कैंपमेंट विरोध प्रदर्शन में कई कई यहूदी छात्र भी शामिल हैं। उनका कहना है कि उन्होंने यहूदी-विरोधी घटनाओं को खारिज कर दिया है और वे फिलिस्तीनियों का समर्थन करने के लिए वहां मौजूद हैं।

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