पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार, द्विपक्षीय समझौते और हवाई क्षेत्र निलंबित किए। शिमला समझौता भी स्थगित, वाघा बॉर्डर बंद। सिंधु जल संधि पर भी तीखी प्रतिक्रिया।

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कठोर फैसले किए हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान ने गुरुवार को भारत के साथ व्यापार, द्विपक्षीय समझौतों और हवाई क्षेत्रों को निलंबित करने सहित अन्य कदमों की घोषणा की है।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) की बैठक की। इसमें रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सशस्त्र बलों के प्रमुखों सहित टॉप सरकारी व सैन्य अधिकारी शामिल हुए।

पाकिस्तान ने शिमला समझौते को किया निलंबित

बैठक के बाद PMO ने कहा कि भारत ने लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की अवहेलना की है। पाकिस्तान 1972 के शिमला समझौते को निलंबित कर रहा है। भारत के साथ वाघा बॉर्डर बंद कर देगा।

PMO ने कहा, "पाकिस्तान शिमला समझौते सहित भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित रखने के अधिकार का प्रयोग करेगा, जब तक कि भारत पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय हत्याओं और कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन न करने के अपने व्यवहार से बाज नहीं आता।"

वाघा सीमा चौकी को पाकिस्तान ने किया बंद

NSC ने फैसला किया कि पाकिस्तान वाघा सीमा चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद कर देगा। इस रास्ते से भारत के सामानों को आने नहीं दिया जाएगा। जिन लोगों ने वैध कागजात के साथ सीमा पार किया है वे 30 अप्रैल तक लौट जाएं।

सिंधु का पानी रोका तो माना जाएगा युद्ध

पाकिस्तान के PMO ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को स्थगित रखने की भारत की घोषणा को खारिज करता है। यह संधि बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसमें एकतरफा निलंबन का कोई प्रावधान नहीं है। सिंधु सिस्टम का पानी पाकिस्तान का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित है। यह पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों के लिए जीवन रेखा है। इसकी उपलब्धता को हर कीमत पर सुरक्षित रखी जाएगी।

सिंधु जल संधि के अनुसार पाकिस्तान के जल के प्रवाह को रोकने या मोड़ने तथा निचले तटवर्ती क्षेत्र के अधिकारों के हनन के किसी भी प्रयास को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। पूरी ताकत से इसका जवाब दिया जाएगा।