मार्शल लॉ लगाने का फैसला दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून सूक येओल को भारी पड़ा। महाभियोग प्रस्ताव के बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया है और अब प्रधानमंत्री कार्यवाहक राष्ट्रपति का पदभार संभालेंगे।

वर्ल्ड डेस्क। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सूक येओल को देश में मार्शल लॉ लगाना महंगा पड़ा है। नेशनल असेंबली ने शनिवार को राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग चलाने का फैसला किया। मतदान के बाद यून सूक येओल को उनके पद से निलंबित कर दिया गया।

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राष्ट्रपति के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में 204 सांसदों ने मतदान किया। वहीं, राजधानी सियोल में संसद भवन के बाहर हजारों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और यूं को हटाने की मांग को लेकर नारे लगाए। यून को पद से निलंबित किए जाने के बाद प्रधानमंत्री हान डक-सू कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि पिछले सप्ताह यून महाभियोग प्रस्ताव से बच गए थे, लेकिन वह अधिक समय तक सत्ता में नहीं बने रहे। मार्शल लॉ लागू करने के प्रयास विफल होने के बाद उनसे पद छोड़ने की मांग बढ़ रही थी।

संवैधानिक न्यायालय करेगा बड़ा फैसला

अब दक्षिण कोरिया का संवैधानिक न्यायालय यह तय करेगा कि यून सूक येओल को राष्ट्रपति के पद पर बहाल किया जाए या उन्हें हटाने का फैसला सही है। इसमें छह महीने तक का समय लग सकता है। 3 दिसंबर को यूं सूक योल ने मार्शल लॉ घोषित किया गया। इसके बाद सैनिकों को नेशनल असेंबली में भेजा गया। इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। नेशनल असेंबली में मार्शल लॉ के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इसके चलते चंद घंटों में ही यूं सूक योल को मार्शल लॉ हटाना पड़ा था।

बता दें कि दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली में विपक्षी दलों की बहुमत है। इसके चलते यह राजनीतिक लड़ाई चल रही है। यून ने विपक्ष पर सरकार को पंगु बनाने का आरोप लगाते हुए मार्शल लॉ की घोषणा की थी।

पिछले शनिवार को यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन पीपुल पावर पार्टी के सांसदों ने सदन में मतदान का बहिष्कार किया, जिससे वह बच गए थे। इस शनिवार को उनकी अपनी पार्टी के कुछ सदस्यों ने महाभियोग प्रस्ताव को पारित करने में मदद की।

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