Asianet News HindiAsianet News Hindi

परंपरा: नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जवारे, क्या है इसका जुड़े मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक पक्ष?

इन दिनों शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2021) की पर्व चल रहा है। जैसे हर त्योहार से कोई न कोई परंपरा अवश्य जुड़ी होती है, उसी तरह नवरात्रि से भी कई पंरपराएं जुड़ी हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है नवरात्रि में जवारे बोना। 

Navratri 2021, know the reasong behind sowing jware in this festival
Author
Ujjain, First Published Oct 11, 2021, 7:00 AM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

उज्जैन. मां दुर्गा की पूजा जवारों के बगैर अधूरी है। घर हो या पूजा पंडाल हर जगह माता के दरबार में जवारे अवश्य ही मिलेंगे। दरअसल इस पवित्र विधि में कलश के सामने मिट्टी के पात्र में जौ को बोते हैं। इस परंपरा से जुड़़े कईं वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पक्ष हैं।

क्यों बोया जाता है जौ?
नवरात्रि (Sharadiya Navratri 2021) में जौ बोने की इस परंपरा के पीछे तर्क यह है कि सृष्टि के आरंभ में जौ ही सबसे पहली फसल थी। जौ बोने की यह प्रथा हमें यह सीख देती है कि हम सदैव अपने अन्न और अनाज का सम्मान करें। इस फसल को हम देवी मां को अर्पित करते हैं। इस जौ (जवारे) को उगाया जाता है। पूजा घर में जमीन पर जौ को बोते समय मिट्टी में गोबर मिलाकर मां दुर्गा का ध्यान करते हुए जौ बोए जाते हैं।

जवारों से जुड़ा मनोवैज्ञानिक पक्ष
जौ बोने का एक अन्य पौराणिक मुख्य कारण व धार्मिक मान्यता है कि अन्न ब्रह्मा है। इसलिए अन्न का सम्मान करना चाहिए। इसे हवन के समय देवी-देवताओं को भी अर्पित किया जाता है। जौ अगर तेजी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है। यदि यह मुरझाएं और ठीक से ना बढ़ें तो अशुभ माना जाता है। नवरात्रि के दौरान की जाने वाली कलश स्थापना के समय उसके नीचे रेत रखकर जल एक लोटा चढ़ाने का महत्व है।

जवारों से जुड़ा वैज्ञानिक पक्ष
आयुर्वेद के अनुसार, जवारे एक प्रकार की औषधि है। इसका रस पीने से अनेक रोगों में आराम मिलता है। जवारों का रस शरीर के लिए शक्तिशाली टॉनिक है। इसमें शरीर को स्वस्थ रखने वाले पांचो तत्वों में से चारों तत्व कार्बोहाईड्रेट, विटामिन, क्षार एवं प्रोटीन पाए जाते हैं। इसका रस पीने से पीलिया, दमा, पेट दुखना, पाचन क्रिया की दुर्बलता, अपच, गैस, विटामिन ए की कमी से होने वाले रोग आदि बीमारियों में फायदा होता है। इसके अलावा विटामिन बी की कमी से होने वाले रोग, जोड़ों में सूजन, गठिया, पथरी, हृदयरोग, डायबिटीज, पायरिया रोगों में भी ये फायदेमंद है। स्किन एलर्जी सम्बन्धी रोग, आंखें के रोग, बालों का झाड़ना, जली त्वचा के निशान मिटाने के लिए भी जवारों का रस पीना लाभकारी है।

नवरात्रि के बारे में ये भी पढ़ें

नवरात्रि में ध्यान रखें वास्तु के ये खास टिप्स, दूर हो हो सकती है घर की निगिटिविटी

सपने में मां दुर्गा का दिखना होता है शुभ, लेकिन क्रोधित रूप में दिखे तो हो जाएं सावधान

मां दुर्गा ने कब, कौन-सा अवतार लेकर किया दुष्टों का संहार, नवरात्रि में जानिए देवी की कथाएं

10 अक्टूबर को करें देवी कूष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा, ये है पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती

1 हजार साल पुराना है ये देवी मंदिर, यहां आकर टूट गया था औरंगजेब का घमंड

परंपराएं: नवरात्रि में व्रत-उपवास क्यों करना चाहिए, इस दौरान क्यों किया जाता है कन्या पूजन?

नवरात्रि में योग-साधना कर जाग्रत करें शरीर के सप्तचक्र, हर मुश्किल हो जाएगी आसान

नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और ज्योतिष के ये उपाय करने से दूर हो सकती है आपकी हर परेशानी

इस मंदिर में दिन में 3 बार अलग-अलग रूपों में होती है देवी की पूजा, 51 शक्तिपीठों में से एक है ये मंदिर

ढाई हजार साल पुराना है राजस्थान का ये देवी मंदिर, इससे जुड़ी हैं कई पौराणिक कथाएं

इस वजह से 9 नहीं 8 दिनों की होगी नवरात्रि, जानिए किस दिन कौन-सा शुभ योग बनेगा

मां शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक ये हैं मां दुर्गा के 9 रूप, नवरात्रि में किस दिन कौन-से रूप की पूजा करें?

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios