14 अप्रैल, बुध‌वार को सूर्य राशि बदलकर मीन से मेष में प्रवेश करेगा। इसे मेष संक्रांति कहते हैं। ज्योतिष ग्रंथों में इसे विषुव संक्रांति भी कहते हैं।

उज्जैन. सौर मास (सोलर कैलेंडर) को मानने वाले लोग इसी दिन को नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। मेष संक्रांति से हर तरह के शुभ और मांगलिक कामों की शुरुआत हो जाती है।

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स्नान दान के लिए तकरीबन 6 घंटे रहेगा पुण्यकाल
- मेष संक्रांति पर भगवान सूर्य की पूजा के साथ ही तीर्थ स्नान और दान करने की परंपरा है। इसके लिए पुण्यकाल सूर्योदय से शुरू हो जाएगा और दोपहर तकरीबन 12.22 तक रहेगा।
- इस मौके पर भगवान सूर्य की विशेष पूजा करनी चाहिए। 14 अप्रैल, बुधवार को सूरज उगने से पहले उठने के बाद तीर्थ के जल से नहाएं और फिर सूर्य को जल चढ़ाएं।
- इसके लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें चावल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- जल चढ़ाने के बाद श्रद्धा अनुसार अन्न, जल, कपड़े और अन्य चीजों के दान का संकल्प लेना चाहिए और फिर दान करना चाहिए।

इन चीजों का करें दान
1.
मेष संक्रांति पर जरूरतमंद लोगों को खाने-पीने की चीजों का दान करना चाहिए। इस दिन कपड़े और जूते-चप्पल भी दान करें। वहीं, गाय को घास भी खिलानी चाहिए।
2. सूर्य पूजा के इस पर्व पर सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन आदि का दान करें।
3. इस दिन अपनी श्रद्धानुसार इन में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इस दिन खाने में नमक का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।

शुभ कामों की शुरुआत
पिछले एक महीने से मीन संक्रांति से खरमास होने के कारण मांगलिक कामों पर रोक लगी हुई थी। अब 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में आने से खरमास खत्म हो जाएगा। जिससे शुभ कामों की शुरुआत हो जाएगी। 14 अप्रैल से ही सभी शुभ काम शुरू हो जाएंगे, लेकिन विवाह के लिए शुभ मुहूर्त 22 अप्रैल को रहेगा। इसके बाद शादियों का दौर शुरू हो जाएगा।