Ganesh Utsav: दक्षिण भारत के पुडुचेरी में है भगवान श्रीगणेश का ये प्राचीन मंदिर, स्वर्ण जड़ित रथ है इसकी पहचान

Published : Sep 18, 2021, 12:44 PM IST
Ganesh Utsav: दक्षिण भारत के पुडुचेरी में है भगवान श्रीगणेश का ये प्राचीन मंदिर, स्वर्ण जड़ित रथ है इसकी पहचान

सार

अभी गणेश उत्सव (Ganesh Utsav 2021) चल रहा है और इसका समापन 19 सितंबर, रविवार को होगा। इन दिनों में गणेशजी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। हमारे देश में भगवान श्रीगणेश के अनेक प्राचीन मंदिर हैं। उन्हीं में से एक है दक्षिण भारत के पुडुचेरी में स्थित मनाकुला विनायगर मंदिर (Manakula Vinayagar Temple)।

उज्जैन.  दक्षिण भारत के पुडुचेरी में स्थित मनाकुला विनायगर मंदिर (Manakula Vinayagar Temple) गणेशजी के प्रसिद्ध तीर्थों में से एक है। क्षेत्र में मान्यता प्रचलित है कि सन् 1666 में यहां फ्रांसीसियों का एक दल आया था, मंदिर का इतिहास उससे भी पहले का है। जानिए मंदिर से जुड़ी खास बातें...
 

सुंदर चित्रों से बताई गई है गणेशजी की कहानियां
मंदिर के निर्माण की दृष्टि से ये भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर बहुत ही सुंदर है और यहां चित्रों के माध्यम से गणेशजी से जुड़ी कथाएं बताई गई हैं। गणेशजी का जन्म, विवाह, शेषनाग के साथ गणेशजी, मोर पर सवार गणेशजी आदि कई प्रतिमाएं यहां दीवारों पर बनी है। शास्त्रों में बताए गए गणेश के 16 स्वरूपों के चित्र भी यहां देखे जा सकते हैं। मंदिर का मुख समुद्र की ओर है। इसीलिए इसे भुवनेश्वर गणेश भी कहते हैं। तमिल में मनल का मतलब बालू रेत और कुलन का मतलब सरोवर होता है। पुराने समय में गणेश प्रतिमा के आसपास ढेर सारी बालू रेत थी, इसलिए इन्हें मनाकुला विनायगर गणेश (Manakula Vinayagar Temple) कहा जाने लगा।

स्वर्ण जड़ित रथ है मंदिर की पहचान
मंदिर में काफी मात्रा में सोना दिखाई देता है। इसका क्षेत्रफल करीब 8 हजार वर्ग फीट है। मंदिर की सजावट में सोने का उपयोग खासतौर पर किया गया है। गणेशजी की मूल प्रतिमा के अलावा यहां करीब 58 प्रतिमाएं और हैं। मंदिर में 10 फीट ऊंचा एक रथ भी है। जो सोने से बना हुआ है। यहां हर साल अगस्त-सितंबर माह में ब्रह्मोत्सव होता है, जो कि 24 दिनों तक चलता है।

कैसे पहुँचे?
- बंगाल की खाड़ी से 400 मीटर पश्चिम में स्थित मनाकुला विनायगर मंदिर (Manakula Vinayagar Temple) तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 165 किमी दक्षिण में और विलुप्पुरम से 35 किमी पूर्व में स्थित है। 
- मंदिर का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुडुचेरी हवाई अड्डा है जो यहाँ से लगभग 6 किमी की दूरी पर स्थित है। पुडुचेरी हवाईअड्डे से हैदराबाद और बेंगलुरु के लिए उड़ान उपलब्ध है। 
- पुडुचेरी रेलमार्ग से भी विलुप्पुरम और चेन्नई से जुड़ा हुआ है, जहाँ कई ट्रेनें नियमित तौर पर संचालित हैं। 
- इसके अलावा सड़़क मार्ग और जलमार्ग से भी पुडुचेरी भारत के कई शहरों से जुड़ा हुआ है।

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