
फूड डेस्क: आम फलों का राजा है यह कहावत हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता, बल्कि इसका स्वाद और उसकी वैरायटी इतनी होती है कि यह न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी खूब खाया जाता है। आम की इसी वर्सेटिलिटी को देखते हुए हर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय आम दिवस यानी कि नेशनल मैंगो डे मनाया जाता है। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं आम का इतिहास और भारत के अलावा किन देशों में आम को राजा कहा जाता है।
आम नहीं आम का इतिहास
आम को वैज्ञानिक भाषा में मेंगीफेरा इंडिका के नाम से जाना जाता है। आम का इतिहास हजारों साल पुराना है। जानकारी के मुताबिक, आम की सबसे पहले खेती 5000 साल पहले की गई थी। यानी कि चौथी और पांचवी ईसा पूर्व के बीच दक्षिण पूर्व एशिया में पहली बार आम उगाया गया था। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि बुद्ध को आम का बाग तोहफे में दिया गया था और 1498 में केरल में इसे मसाले के व्यापार के लिए अपनाया गया था। 1700 तक यह ब्राजील और 1740 तक वेस्टइंडीज में भी आम खाया जाने लगा और धीरे-धीरे इसकी व्यापकता बढ़ गई। इसके स्वाद और टेक्सचर के कारण इसे फलों का राजा कहा जाता है।
क्यों मनाया जाता है आम उत्सव
नेशनल मैंगो डे को मनाने की शुरुआत सबसे पहले 1987 में हुई थी। तब से हर साल 22 जुलाई को नेशनल मैंगो डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आम के आयात को बढ़ाना है और इसके फायदे और वैरायटी के बारे में लोगों को जागरूक करना है।
इन देशों में भी फलों का भी राजा है आम
आम सिर्फ भारत में ही फलों का राजा नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में आम के पेड़ को राष्ट्रीय वृक्ष होने की उपाधि मिली है। इसके अलावा पाकिस्तान और फिलिपींस में भी आम राष्ट्रीय फल है। भारत के बाद चाइना में आम खूब खाया जाता है, क्योंकि न सिर्फ यह स्वाद में कमाल होता है बल्कि इसमें विटामिन ए, सी और डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं, इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं, आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं और विटामिन सी और ए के कारण यह हमारी स्किन और बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
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