किसानों को डिजिटल और ‘हाई-टेक’ सेवाएं देने के लिए सरकार निजी कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों और कृषि मूल्य श्रृंखला के अंशधारकों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की भागीदारी में पीपीपी आधार पर एक योजना शुरू करेगी।

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2022-23 को पेश करते हुए कहा है कि इस साल किसानों (Farmers) को डिजिटल सेवाएं (digital services) उपलब्ध करवाने पर जोर होगा। यानी डिलिटल कृषि (Digital Agriculture) पर फोकस होगा। किसानों को डिजिटल और हाईटेक सुविधाओं को प्रदान करने के लिए सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी पर काम करेगी। वहीं, खेती में ड्रोन का भी उपयोग किया जाएगा। खेती में डिजिटल इंटेलिजेंस को बढ़ाकर कृषि क्षेत्र और किसानों को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी।

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लैंड रिकॉर्ड और किसानों का डाटा
केंद्र सरकार पीएम किसान योजना के तहत इकट्ठा की गई किसानों की डिटेल और रेवेन्यू रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन के आधार पर किसानों का एक डेटाबेस तैयार करने में जुटी हुई है। देश में 6,55,959 गांव हैं। जिसमें से लगभग 6 लाख गांवों के रेवेन्यू रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन हो चुका है। भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस से किसानों की डिटेल को लिंक करके सरकार एक ऐसा डेटाबेस बना रही है जिससे कि उन्हें बार-बार वेरिफिकेशन की जरूरत न हो। 

डिजिटल और उच्च-प्रौद्योगिकी वाली सेवाओं के वितरण के लिए किसान ड्रोन, रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को बढ़ावा देने की घोषणा की है। संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि समावेशी विकास सरकार की आगे बढ़ने की चार प्राथमिकताओं में से एक है।

समावेशी विकास के तहत सरकार फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए 'किसान ड्रोन' के उपयोग को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमों के वित्तपोषण के लिए नाबार्ड के माध्यम से सह-निवेश मॉडल के तहत जुटाई गई मिश्रित पूंजी के साथ एक कोष की सुविधा भी प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि किसानों को डिजिटल और ‘हाई-टेक’ सेवाएं देने के लिए सरकार निजी कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों और कृषि मूल्य श्रृंखला के अंशधारकों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की भागीदारी में पीपीपी आधार पर एक योजना शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को डिजिटल और ‘हाई-टेक’ सेवाएं देने के लिए सरकार निजी कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों और कृषि मूल्य श्रृंखला के अंशधारकों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की भागीदारी में पीपीपी आधार पर एक योजना शुरू करेगी।

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