Akash Gupta Zypp Electric: शुरुआत में ₹13 हजार की सैलरी, पहले बिजनेस में नाकामी और शार्क टैंक से रिजेक्शन। आज उसी कंपनी की वैल्यू ₹3,000 करोड़ से ज्यादा है। यह कहानी है आकाश गुप्ता की, जिन्होंने बिना पैसों के, सिर्फ अपनी मेहनत से करोड़ों का बिजनेस खड़ा कर दिया।
Zypp Electric Founder Story: आपने सड़कों पर दौड़ती हरे रंग की स्कूटर जरूर देखी होगी, जो अक्सर आपके घर पर सामान डिलीवर करने आती है। ये स्कूटर जिप (Zypp) इलेक्ट्रिक कंपनी की हैं। आज इस कंपनी का रेवेन्यू ₹470 करोड़ से ज्यादा है और वैल्यूएशन करीब ₹3,000 करोड़ तक पहुंच गया है। लेकिन इस करोड़ों के साम्राज्य की नींव किसी बड़े इन्वेस्टर ने नहीं, बल्कि एक मां के थप्पड़ ने रखी थी! यह कहानी है जिप इलेक्ट्रिक के को-फाउंडर और सीईओ आकाश गुप्ता की।
मां के एक थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी की दिशा
यह कहानी जयपुर के एक आम मिडिल क्लास परिवार से शुरू होती है। आकाश के पिता सरकारी डॉक्टर और मां हाउसवाइफ थीं। आकाश का बचपन काफी मौज-मस्ती में बीता और जिंदगी को लेकर कोई गंभीरता नहीं थी। लेकिन चौथी क्लास में एक घटना ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। रिजल्ट का दिन था और 100 में से सिर्फ 44 नंबर आए थे। मार्कशीट देखकर मां गुस्से में थीं। घर आते ही मां का जोरदार थप्पड़ गाल पर पड़ा। उस दिन थप्पड़ से ज्यादा दर्द मां की आंखों में आंसू देखकर हुआ। मां ने रोते हुए कहा, "तुम्हारा नाम आकाश इसलिए नहीं रखा कि तुम अपनी जिंदगी बर्बाद कर दो।" आकाश के लिए यह सिर्फ एक थप्पड़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी। उन्हें समझ आ गया कि कुछ बड़ा करना है तो खुद को बदलना होगा, मेहनत करनी होगी और पसीना बहाना होगा।
₹13 हजार की सैलरी से शुरू हुआ सपना
आकाश के मन में बिजनेसमैन बनने का सपना बचपन से था, लेकिन मिडिल क्लास परिवार के लिए इंजीनियरिंग ही सबसे सीधा रास्ता था। IIT में पढ़ने का सपना पूरा नहीं हुआ, तो एक प्राइवेट कॉलेज से इंजीनियरिंग पूरी की। कॉलेज के बाद इंफोसिस में नौकरी मिली, जहां महीने की सैलरी सिर्फ ₹13,000 थी। परिवार तो खुश था, लेकिन आकाश के मन में बेचैनी थी। उनके IIT में पढ़ने वाले दोस्त ₹10-12 लाख का पैकेज पा रहे थे।
वहीं आकाश को समझ आया कि आम रास्ते पर चलकर वह भीड़ का हिस्सा ही बनकर रह जाएंगे। उन्होंने MBA की तैयारी शुरू की। सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक सिर्फ पढ़ाई करते थे। इस मेहनत का फल मिला और CAT परीक्षा पास करके IMT गाजियाबाद में एडमिशन ले लिया। वहां उन्हें यह बात और भी साफ हो गई कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दिन में 14 से 16 घंटे की कड़ी मेहनत ही कामयाबी का रास्ता है।
₹1 करोड़ का पैकेज... और फिर जीरो!
अगले 10 साल आकाश ने कॉर्पोरेट कंपनियों में काम किया। एक समय ऐसा भी आया जब उनका सालाना पैकेज ₹1 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन बिजनेसमैन बनने का कीड़ा अभी भी मन में था। उन्होंने अपनी पत्नी राशि और मां के साथ मिलकर 'Let's Floatt' नाम का एक छोटा स्टार्टअप शुरू किया। फिर आकाश ने ₹1 करोड़ की नौकरी छोड़ दी। सैलरी ₹0 हो गई। यह बात उन्होंने परिवार से भी छिपाई थी। इसके बाद Mobycy नाम का साइकिल शेयरिंग बिजनेस शुरू किया, जो बुरी तरह फेल हो गया। ₹1 करोड़ की नौकरी छोड़ने वाले आकाश को दोपहर की धूप में मेट्रो स्टेशनों के बाहर खड़े होकर पर्चे बांटने पड़े, ताकि लोग उनकी सर्विस इस्तेमाल करें।
नाकामी से पैदा हुई ‘जिप इलेक्ट्रिक’
पैसे खत्म हो चुके थे और टीम के लोग भी आधे रह गए थे। लेकिन हार मानना आकाश के स्वभाव में नहीं था। साइकिल शेयरिंग बिजनेस फेल होने के बाद उन्होंने अपना ध्यान इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की तरफ लगाया। यहीं से जन्म हुआ Zypp Electric का।
शार्क टैंक इंडिया में भी मिला रिजेक्शन!
आकाश गुप्ता और उनकी को-फाउंडर राशि अग्रवाल Zypp Electric का आइडिया लेकर Shark Tank India के मंच पर पहुंचे। उस समय भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सेक्टर नया था। उनके पास करीब 2,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर थे, लेकिन आकाश को भरोसा था कि अगले 6 से 8 महीनों में वे इसे 10,000 तक पहुंचा देंगे। उन्होंने कंपनी के लिए ₹220 करोड़ की वैल्यूएशन पर 1% हिस्सेदारी के बदले ₹2.2 करोड़ की मांग की। लेकिन शार्क्स को यह डील पसंद नहीं आई। नतीजा यह हुआ कि Zypp Electric को बिना किसी डील के शार्क टैंक से वापस आना पड़ा।
₹220 करोड़ की कंपनी आज ₹3,000 करोड़ की बनी!
शार्क टैंक से रिजेक्शन मिलने के बाद भी आकाश और राशि रुके नहीं। उनका स्टार्टअप तेजी से बढ़ा और इन्वेस्टर्स का ध्यान खींचने लगा। जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने GoodYear Ventures, Venture Catalysts, Indian Angel Network और 100 Unicorns जैसे कई निवेशकों से कुल $76.5 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। आज इस कंपनी की वैल्यू $331 मिलियन, यानी करीब ₹3,000 करोड़ से भी ज्यादा हो गई है। Zypp Electric आज पूरे देश में धूम मचा रही है।
कभी महीने के ₹13,000 कमाने वाले आकाश गुप्ता की कंपनी के साथ काम करने वाले हजारों डिलीवरी पार्टनर्स आज महीने का ₹30,000-₹40,000 तक कमा रहे हैं। आकाश कहते हैं कि उनका असली कनेक्शन उन गिग वर्कर्स से है, जो उन्हीं की तरह मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं और अपने परिवार के लिए दिन में 14 घंटे काम करने को तैयार रहते हैं।
