Fake Solar Panel Alert: सोलर पैनल लगवाने से पहले DCR चेक करना जरूरी है। बिना DCR वाले नकली या गैर-मान्य पैनल बड़ा नुकसान करवा सकते हैं। जानिए असली की पहचान कैसे करें?
DCR vs Non DCR Solar Panels: अगर आप भी बिजली के भारी बिल से छुटकारा पाने के लिए घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। आजकल बाजार में सस्ते पैनलों की बाढ़ आई हुई है। कई अनधिकृत वेंडर ग्राहकों को कम दाम का लालच देकर या असली बताकर ऐसे पैनल थमा रहे हैं, जिन पर बाद में सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी अटक जाती है। सोलर सिस्टम लगवाने से पहले DCR को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। अगर आपकी छत पर लगा पैनल DCR नहीं है, तो आपकी जेब पर डबल नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कि DCR पैनल क्या होता है और महज 2 मिनट में अपने मोबाइल से आप खुद कैसे जांच सकते हैं कि पैनल असली है या नकली...
DCR पैनल क्या है और यह क्यों जरूरी है?
DCR का पूरा नाम है डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (Domestic Content Requirement)। आसान शब्दों में कहें तो 'पूरी तरह भारत में बना सोलर पैनल'।
नियम क्या कहता है: केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का साफ नियम है कि सरकारी सब्सिडी का फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनके घर में DCR पैनल लगे होंगे।
फर्क क्या है: इसमें पैनल का कांच, फ्रेम और सबसे खास अंदर लगे सोलर सेल होते हैं। सभी भारत में ही बने होने चाहिए। कई वेंडर बाहर जैसे चीन से सस्ते सेल लाकर भारत में असेंबल कर देते हैं और उसे नॉन-DCR कहा जाता है। ऐसे पैनल्स पर सरकार एक रुपया भी सब्सिडी नहीं देती है।
असली DCR पैनल की पहचान करने के 4 तरीके
1. कांच के अंदर वाला RFID टैग देखें
हर असली सोलर पैनल के कांच (ग्लास) के ठीक नीचे एक छोटा RFID चिप या टैग सील होता है। ध्यान रखें कि यह टैग पैनल के ऊपर से चिपकाया हुआ स्टीकर नहीं होना चाहिए, बल्कि लेमिनेशन के अंदर होना चाहिए। इसमें कंपनी का नाम, निर्माण का महीना-साल और देश का नाम लिखा होता है।
2. बारकोड और सीरियल नंबर को मैच करें
सोलर पैनल के फ्रेम पर लगे स्टीकर का सीरियल नंबर और कांच के अंदर मौजूद RFID चिप का सीरियल नंबर बिल्कुल एक जैसा होना चाहिए। अगर दोनों नंबर अलग हैं, तो समझ जाएं कि पैनल के साथ छेड़छाड़ हुई है।
3. ALMM लिस्ट में कंपनी का नाम चेक करें
सरकार का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) एक लिस्ट जारी करता है, जिसे ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) कहते हैं। वेंडर जिस ब्रांड का पैनल दे रहा है, बस गूगल पर चेक कर लें कि वह कंपनी और उसका मॉडल इस लिस्ट में शामिल है या नहीं। अगर लिस्ट में नाम नहीं है, तो वह पैनल सब्सिडी के लायक नहीं है।
4. वेंडर से मांगें DCR सर्टिफिकेट
काम शुरू करने से पहले वेंडर से साफ कहें कि बिल के साथ निर्माता कंपनी का आधिकारिक DCR अंडरटेकिंग सर्टिफिकेट चाहिए। असली वेंडर यह कागज देने में कभी आनाकानी नहीं करेगा।
नकली या नॉन-DCR पैनल लगवाने के नुकसान
सब्सिडी का नुकसान
डिस्कॉम (बिजली विभाग) के अधिकारी जब मीटर लगाने और इंस्पेक्शन करने आएंगे, तो वे सबसे पहले पैनल का सीरियल नंबर और RFID स्कैन करते हैं। अगर पैनल DCR नहीं निकला, तो आपकी सब्सिडी तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
खराब परफॉर्मेंस और वारंटी का खतरा
नकली या रिफर्बिश्ड पैनल्स में 25 साल की वारंटी सिर्फ कागजों पर रह जाती है। 2-3 साल बाद इनकी बिजली बनाने की क्षमता 40% तक घट जाती है।
धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या करें?
- सोलर सिस्टम हमेशा सरकार के नेशनल पोर्टल पर रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर्स से ही लगवाएं।
- किसी भी अनजान या बिना रजिस्टर्ड ठेकेदार को सस्ती दरों के झांसे में आकर एडवांस टोकन न दें।
- पैनल पर लगे क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके तुरंत कंफर्म करें।


