पड़ोसी देशों के लिए FDI नियम आसान करने के बाद भारत को 29 प्रस्तावों से 4,895 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। अब 10% से कम हिस्सेदारी वाले निवेशक बिना सरकारी मंजूरी के ऑटोमैटिक रूट से निवेश कर सकते हैं।

नई दिल्ली: भारत ने जबसे अपने पड़ोसी देशों के लिए निवेश के नियम आसान किए हैं, तबसे देश में 4,895 करोड़ रुपये का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आया है। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के आंकड़ों का हवाला देते हुए 'रॉयटर्स' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह पैसा कुल 29 इन्वेस्टमेंट प्रपोजल्स के जरिए आया है। ये निवेश इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर्स और ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ जैसे अहम सेक्टर्स में किए गए हैं।

नए FDI नियम से क्या बदला?

नियमों में हुए इस बदलाव के तहत, भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले देशों (खासकर चीन) के निवेशक अब 'ऑटोमैटिक रूट' से पैसा लगा सकते हैं। शर्त यह है कि किसी कंपनी में उनका मैनेजमेंट कंट्रोल न हो और उनकी हिस्सेदारी 10% से कम हो। इसका मतलब है कि ऐसे निवेशकों को अब सरकार से पहले से मंजूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी और वे सीधे नियमों के मुताबिक निवेश कर सकते हैं।

चीन को बड़ी राहत: भारत के साथ सीमा साझा करने वाली सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के निवेशकों के लिए यह नियम बड़ी राहत लेकर आया है।

2020 में सख्त हुए थे नियम

साल 2020 में भारत ने पड़ोसी देशों से अपनी कंपनियों के टेकओवर के खतरे को देखते हुए FDI के नियम काफी सख्त कर दिए थे। उस वक्त, सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी छोटे-मोटे निवेश के लिए भी सरकार की मंजूरी ज़रूरी थी। लेकिन अब नए नियमों से छोटे और बिना कंट्रोल वाली हिस्सेदारी रखने वाले निवेशकों को काफी सहूलियत मिली है।

इन देशों के रास्ते आया निवेश

कॉमर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक, ये 29 इन्वेस्टमेंट प्रपोजल सीधे नहीं, बल्कि मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्ज़मबर्ग और केमैन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड कंपनियों और निवेशकों के जरिए भारत पहुंचे हैं।