पश्चिमी एशिया तनाव से प्रभावित उद्योगों हेतु केंद्र ने ₹18,100 करोड़ की ECLGS 5.0 योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत MSMEs और एयरलाइंस को अतिरिक्त लोन मिलेगा। एयरलाइंस ₹1,500 करोड़ और अन्य कंपनियां ₹100 करोड़ तक का लोन ले सकेंगी।

नई दिल्ली: पश्चिमी एशिया में लगातार चल रहे तनाव की वजह से भारतीय उद्योग-धंधों पर पड़े बुरे असर से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। सरकार ने 18,100 करोड़ रुपये की 'इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0' (ECLGS 5.0) को मंजूरी दी है। इस स्कीम के तहत छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) के साथ-साथ एयरलाइन कंपनियों को भी अतिरिक्त लोन की सुविधा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए बाजार में कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये का लोन फ्लो सुनिश्चित करना है, जिसमें से 5,000 करोड़ रुपये खासतौर पर एयरलाइन सेक्टर के लिए रखे गए हैं।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का मकसद उन बिजनेस को बचाना है, जो पश्चिमी एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे कंपनियों को मौजूदा संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

नई स्कीम के तहत, पैसेंजर एयरलाइंस अपने कुल बकाये का 100% तक लोन ले सकेंगी, जिसकी ऊपरी सीमा 1,500 करोड़ रुपये होगी। वहीं, दूसरी कंपनियों को वर्किंग कैपिटल यानी कामकाज चलाने के लिए 100 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकेगा। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बाजार में नकदी बढ़ने से बिजनेस को बंद होने से बचाया जा सकेगा और नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।

इस योजना के तहत दिए जाने वाले लोन की गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) देगी। MSMEs को 100% क्रेडिट गारंटी कवर मिलेगा, जबकि बड़ी कंपनियों और एयरलाइंस के लिए यह 90% होगा।

लोन चुकाने के लिए भी अच्छी-खासी मोहलत दी गई है। एयरलाइंस को 2 साल के मोरेटोरियम (जिस दौरान किस्त नहीं चुकानी होगी) के साथ कुल 7 साल का समय मिलेगा। वहीं, MSMEs को 1 साल के मोरेटोरियम के साथ 5 साल में लोन चुकाना होगा। यह फायदा 31 मार्च, 2027 तक दिए जाने वाले लोन पर लागू होगा।

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि यह आर्थिक मदद वैश्विक संकट के बीच देश के एविएशन सेक्टर को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी है। बता दें कि फरवरी में शुरू हुए पश्चिमी एशिया संकट का असर भारत के तेल बाजार और विदेशी व्यापार पर भी पड़ा है, जिसके बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।