चश्मों की मशहूर कंपनी लेन्सकार्ट (Lenskart) अपनी नई ड्रेस कोड पॉलिसी को लेकर विवादों में है। इस पॉलिसी में हिंदू धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी, सिंदूर और हाथ में बंधे कलावे पर रोक लगा दी गई है, जबकि हिजाब पहनने की इजाजत दी गई है। इसे लेकर कंपनी पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।

महाराष्ट्र: नासिक में TCS कंपनी में चल रहे 'कॉर्पोरेट जिहाद' के मामले अभी ठंडे भी नहीं हुए थे कि अब एक और कंपनी की पॉलिसी पर बवाल मच गया है। देश की जानी-मानी आईवेयर कंपनी 'लेन्सकार्ट' (Lenskart) अपने कर्मचारियों के लिए लाए गए नए ड्रेस कोड को लेकर विवादों के केंद्र में है। कंपनी पर आरोप है कि उसने हिंदू धर्म के पारंपरिक प्रतीकों जैसे बिंदी, सिंदूर और हाथ में पहने जाने वाले धार्मिक धागे (कलावा) पर पाबंदी लगा दी है, जबकि हिजाब पहनने की इजाजत दी है।

क्या है लेन्सकार्ट का नया नियम?

सोशल मीडिया पर लेन्सकार्ट की जो आधिकारिक गाइडलाइन्स वायरल हो रही हैं, उनके मुताबिक महिला और पुरुष कर्मचारियों के लिए एक सख्त ड्रेस कोड लागू किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि महिला कर्मचारी माथे पर बिंदी नहीं लगा सकतीं। अगर कोई सिंदूर लगाता है, तो वह बहुत कम होना चाहिए और माथे पर दिखना नहीं चाहिए। इतना ही नहीं, हाथ में बंधे धार्मिक धागे या किसी भी तरह के रिस्ट बैंड को भी हटाने का आदेश दिया गया है।

हिजाब को मिली हरी झंडी

वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई कर्मचारी हिजाब या पगड़ी पहनना चाहता है, तो उसका रंग काला होना चाहिए। गाइडलाइन्स में कहा गया है कि हिजाब छाती को मामूली रूप से ढके और इससे कंपनी का लोगो नहीं छिपना चाहिए। इसके साथ ही, सोने के बड़े झुमके, लटकने वाले ईयररिंग्स और नथ पहनने पर भी रोक है। सिर्फ छोटी मोती या सोने की स्टड्स पहनने की इजाजत दी गई है।

लेन्सकार्ट के खिलाफ फूटा गुस्सा

जैसे ही ये नियम सामने आए, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। यूजर्स लेन्सकार्ट पर हिंदू महिलाओं की धार्मिक पहचान को खत्म करने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं, "जिस कंपनी को हिजाब पहनने की इजाजत देने में कोई दिक्कत नहीं, उसे बिंदी और धार्मिक धागे से एलर्जी क्यों है?"

एक यूजर ने लिखा, "लेन्सकार्ट में काम करते हुए आप सिंदूर, बिंदी या कलावा नहीं पहन सकते, लेकिन हिजाब पहन सकते हैं। यह हिंदू महिलाओं की पहचान मिटाने की कोशिश है।"

एक अन्य यूजर ने लिखा, "ये कौन लोग हैं जो ऐसे कानून बना रहे हैं? हमारे ही देश में ये कौन होते हैं तय करने वाले कि हिंदू कैसे रहेंगे? बिंदी और कलावे से इन्हें क्या दिक्कत है?" वहीं एक और शख्स ने कमेंट किया, "हिंदू संगठनों, क्या आप सुन रहे हैं? अब लेन्सकार्ट मैनेजमेंट को सबक सिखाने का वक्त आ गया है। मैं अब इनसे कुछ नहीं खरीदूंगा और अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को भी यही बताऊंगा।"

एक यूजर ने सलाह दी, "सभी हिंदू पुरुष और महिलाएं ध्यान दें, आप कहीं भी रहें, अपनी संस्कृति और धार्मिक रिवाजों से दूर न हों। सेक्युलरिज्म के नाम पर अपनी पहचान मत छोड़िए।"

लेन्सकार्ट के इन 'एकतरफा' नियमों ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। वर्कप्लेस पर बराबरी की बात के बीच, एक धर्म की परंपराओं पर रोक और दूसरे को छूट देना कंपनी के लिए मुसीबत बन सकता है। इस मामले पर लेन्सकार्ट की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।