दुनिया के कई देशों में भारत से प्याज भेजा जाता है। टमाटर के बाद प्याज के दाम को बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, इस फैसले के बाद कई राज्यों में प्याज की कीमत बढ़ गई है।

बिजनेस डेस्क : टमाटर के आसमान छूते दाम को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्याज को लेकर बड़ा कदम उठाया है। देशभर में प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसके बाद देशभर में प्याज की कीमतें (Onion Price Hike) बढ़ गई हैं। कई राज्यों में प्याज पर 2-5 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जबकि कुछ जगहों पर प्याज 20 रुपए तक महंगा हो गया है। अब सवाल ये उठ रहा है कि सरकार के इस कदम से आखिर आम जनता का क्या फायदा है? इसी का जवाब जानने के लिए आइए जानते हैं प्याज पर केंद्र के 40% निर्यात शुल्क के पीछे का कारण...

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सरकार ने तय की प्याज की कीमत

महंगे प्याज को देखते हुए केंद्र ने दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में रियायती दर पर प्याज के स्टॉक की पेशकश की है। केंद्र ने सब्सिडी वाले प्याज स्टॉक की कीमत 25 रुपए प्रति किलो तय की है। जिससे आम जनता को राहत मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य प्याज की कीमतों को काबू करना है, ताकि उसका हाल भी टमाटर जैसा न हो।

प्याज पर 40% निर्यात शुल्क क्यों

दरअसल, भारत प्याज के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। यहां से बड़ी संख्या में प्याज दूसरे देशों में भेजा जाता है। केंद्र की तरफ से प्याज पर लगाया गया निर्यात शुल्क दुनिया भर में आवश्यक वस्तु के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए है। इस कारण देश में ही सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। जबकि देश में प्याज की कीमतों की मुद्रास्फीति पिछले दो सालों में नकारात्मक बनी हुई है। इसी साल जुलाई में यह 11 प्रतिशत से ज्यादा हो गई थी। इसलिए जरूरी चीजों की कीमतों की इस मुद्रास्फीति को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने प्याज पर निर्यात शुल्क लगाया, ताकि प्याज का निर्यात कम हो सके।

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