Gobar Dhan Yojana: पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि गोबर-धन स्कीम के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की नई कीमतों का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय के मुताबिक, भले ही सरकार उत्पादकों से महंगी CBG खरीदेगी, लेकिन सरकारी मदद और एक बड़े गैस पूल की वजह से CNG और PNG की कीमतों पर इसका असर ना के बराबर होगा।

CNG Price Impact: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को साफ किया है कि गोबर-धन स्कीम के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की नई कीमतें उत्पादकों को एक स्थिर दाम देने के लिए तय की गई हैं। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव का CNG और घरेलू PNG इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर असर लगभग ना के बराबर होगा।

मंत्रालय ने ग्राहकों पर बोझ की रिपोर्ट को खारिज किया

मंत्रालय ने एक अखबार की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि गोबर-धन स्कीम के तहत CBG की बढ़ी हुई कीमतों का CNG और घरेलू PNG ग्राहकों पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। मंत्रालय ने कहा कि CBG की खरीद कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों के लिए भी दाम उतने ही बढ़ जाएंगे। सरकार इस पर सब्सिडी दे रही है और बढ़ी हुई लागत को एक बड़े डोमेस्टिक गैस पूल में बांटा जाएगा।

कीमतों का नया सिस्टम और सपोर्ट मैकेनिज्म

मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा सिस्टम में, CBG उत्पादकों को दी जाने वाली कीमत CNG के रिटेल सेलिंग प्राइस के 85 फीसदी से जुड़ी होती है, जो अभी करीब 1,478 रुपये प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) बैठती है।

गोबर-धन के नए फ्रेमवर्क के तहत, CBG की कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBtu तय की गई है, जो करीब 43 फीसदी ज़्यादा है। हालांकि, मंत्रालय ने साफ किया कि यह वो कीमत है जो उत्पादकों को दी जाएगी, न कि वो जो सीधे CNG या घरेलू PNG ग्राहकों से वसूली जाएगी।

सरकार 95 फीसदी मीथेन वाली CBG पर 10 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी देगी, जो करीब 215 रुपये प्रति MMBtu के बराबर है। इस मदद को हटाने के बाद, गैस ग्राहकों से वसूली जाने वाली CBG की प्रभावी लागत लगभग 1,895 रुपये प्रति MMBtu होगी, जो मौजूदा कीमत से करीब 28 फीसदी ज़्यादा है।

ग्राहकों पर असर कैसे कम किया जाएगा?

मंत्रालय ने कहा कि इसलिए पूरी बढ़ी हुई कीमत ग्राहकों से नहीं वसूली जाएगी। इसके अलावा, CBG को सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को उसकी खरीद कीमत पर नहीं बेचा जाता, बल्कि इसे देश में पैदा होने वाली दूसरी नेचुरल गैस के साथ मिला (पूल) दिया जाता है। नए फ्रेमवर्क के तहत, CBG की कुल लागत को पहले के मुकाबले 2.5 से 3 गुना बड़े डोमेस्टिक गैस बेस पर बांटा जाएगा। पहले यह लागत सिर्फ CNG (ट्रांसपोर्ट) और घरेलू PNG सेगमेंट को मिलने वाली एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) गैस की सीमित मात्रा पर डाली जाती थी।

मंत्रालय ने कहा, "CBG उत्पादकों को एक स्थिर और फायदेमंद कीमत मिलेगी जिससे प्लांट लंबे समय तक चल सकेंगे, वहीं सरकार की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी और एक बड़े गैस पूल की वजह से ग्राहकों पर किसी भी तरह का बड़ा असर नहीं पड़ेगा।" मंत्रालय के मुताबिक, इस नए फ्रेमवर्क को इस तरह डिजाइन किया गया है कि CBG प्लांट भी चलते रहें और ग्राहकों की जेब पर भी बोझ न पड़े।