बेंगलुरु में महंगे जीवन पर एक वायरल पोस्ट ने रियल एस्टेट की लूट को उजागर किया है। इसमें मकान व PG मालिकों और ब्रोकर्स को सबसे ज्यादा कमाने वाला बताया गया है, जबकि IT पेशेवर संघर्ष कर रहे हैं।
बेंगलुरु: भारत की 'आईटी राजधानी' और 'सिलिकॉन वैली' कहे जाने वाले बेंगलुरु में रियल एस्टेट की लूट और महंगे रहन-सहन को लेकर एक कंटेंट क्रिएटर साक्षी की पोस्ट सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त वायरल हो रही है। साक्षी ने X (पहले ट्विटर) और रेडिट पर बेंगलुरु में सबसे ज़्यादा सैलरी वाली 'नौकरियों' की एक मज़ेदार लिस्ट शेयर की है।
साक्षी की लिस्ट में ये हैं 5 सबसे ज़्यादा कमाई वाले ‘काम’
- पीजी (PG) मालिक
- सिगरेट (गुमटी) की दुकान के मालिक
- बेंगलुरु में मकान मालिक (लैंडलॉर्ड)
- वॉटर टैंकर के मालिक
- रियल एस्टेट ब्रोकर
पीजी का खेल
साक्षी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि कैसे पीजी मालिक एक कमरे में तीन लोगों को रखते हैं और हर किसी से 10,000 से 15,000 रुपये वसूलते हैं। वे खुद फ्लैट के लिए 40,000 रुपये किराया देते हैं, लेकिन हर महीने 1 से 1।5 लाख रुपये का मुनाफा कमाते हैं। साक्षी ने मज़ाकिया अंदाज़ में यह भी बताया कि कैसे मकान मालिक किराएदारों की परेशानियों की परवाह किए बिना ज़्यादा से ज़्यादा किराया वसूलते हैं।
रियल एस्टेट ब्रोकर
पोस्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट ब्रोकर आपको ऐसे फ्लैट दिखाते हैं जहां या तो पानी टपकता है या चूहों का आतंक होता है। वे कहते हैं कि फ्लैट 'मेट्रो से वॉकिंग डिस्टेंस' पर है, लेकिन असल में वह 5 किलोमीटर दूर होता है। फिर भी, हालात ऐसे बन जाते हैं कि आपको वही फ्लैट लेना पड़ता है। आखिर में, आपको और मकान मालिक, दोनों को मिलकर उन्हें एक महीने का किराया कमीशन के तौर पर देना पड़ता है।
वॉटर टैंकर मालिक
बेंगलुरु में पानी की किल्लत अक्सर बनी रहती है। वॉटर टैंकर मालिक इसी का फायदा उठाते हैं। वे एक टैंकर पानी के लिए 1200 से 1500 रुपये तक चार्ज करते हैं। दिन में कई चक्कर लगाकर वॉटर टैंकर मालिक अच्छी-खासी कमाई कर लेते हैं।
और बेचारे आईटी प्रोफेशनल्स
साक्षी ने आईटी सेक्टर में काम करने वालों की हालत पर तंज कसते हुए लिखा, "और इन सबके बीच, सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात के 2 बजे DSA के सवाल सॉल्व कर रहे होते हैं, इस उम्मीद में कि उनकी सैलरी थोड़ी बढ़ जाएगी।"
सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल
सोशल मीडिया यूजर्स कह रहे हैं कि साक्षी की बातें बिल्कुल सच हैं। एक यूजर ने सवाल उठाया, "नौकरी बचाने के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को यूरोप और अमेरिका के कर्मचारियों के लेवल पर काम करना पड़ता है। लेकिन लिस्ट में 1 से 5 नंबर पर मौजूद लोग जो सर्विस देते हैं, उसकी क्वालिटी क्या है?"
एक अन्य यूजर ने लिखा, "लिस्ट में 1, 3 और 5 नंबर वाले तो असली माफिया हैं। यह बहुत गहराई तक फैला हुआ है। कोविड के दौरान पता चला कि वर्क फ्रॉम होम मुमकिन है, अब AI की लहर भी आ गई है। फिर भी आईटी ऑफिस दूसरी जगह शिफ्ट नहीं हो पा रहे। यह इंसानों की बनाई समस्या है जिसे AI भी हल नहीं कर सकता।"
कुल मिलाकर, साक्षी की इस वायरल पोस्ट ने बेंगलुरु के टेक कर्मचारियों और छात्रों के सामने आने वाली महंगी ज़िंदगी और रियल एस्टेट की लूट पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
