राम मंदिर में नौकरी पाना आसान नहीं है। 6 महीने की कड़क ट्रेनिंग, सख्त इंटरव्यू और मेरिट टेस्ट से गुजरना पड़ता है। जानें पूरा प्रॉसेस और पूछे जाने वाले सवाल...
Ram Mandir Recruitment Process: अयोध्या का राम मंदिर इन दिनों चढ़ावे की चोरी और दान में हेरफेर के मामले में चर्चा में है। इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और ट्रस्ट के दो बड़े पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दे दिया है। इस बीच हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इतने बड़े मंदिर को चलाने के लिए स्टाफ कहां से आता है, वहां नौकरी कैसे मिलती है, इंटरव्यू में किस-किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं? चलिए, बिना आसान तरीके से जानते हैं राम मंदिर में भर्ती की पूरी प्रक्रिया...

राम मंदिर चलाता कौन है?
राम मंदिर का रोज का कामकाज, पैसों का हिसाब और स्टाफ की भर्ती... यह सब 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के हाथ में है। यही ट्रस्ट तय करता है कि किसे नौकरी मिलेगी, किसे कितनी सैलरी मिलेगी और मंदिर का इंतजाम कैसे चलेगा? हाल में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद इस ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल भी हो रहा है, ताकि आगे से सब कुछ साफ-सुथरा और भरोसेमंद रहे।
राम मंदिर में पुजारी बनने के लिए क्या करना होता है?
बहुत लोग सोचते हैं कि मंदिर में पुजारी बनना शायद आसान काम होगा। सच यह है कि यह सबसे मुश्किल भर्तियों में से एक है। जब भी पुजारियों के लिए जगह खाली होती है, ट्रस्ट बाकायदा विज्ञापन निकालता है। पिछली बार 2023 जब भर्ती निकली थी, तो करीब 3,000 लोगों ने अप्लाई किया था। इनमें से सिर्फ 200 लोगों को मेरिट के आधार पर इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और आखिर में सिर्फ 20 लोग ही चुने गए। यानी हर 150 उम्मीदवार में से सिर्फ एक को नौकरी मिली।
इंटरव्यू में होता क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शॉर्टलिस्ट हुए लोगों का इंटरव्यू कारसेवकपुरम में होता है। पैनल में देश के नामी संत-विद्वान बैठते हैं। यहां कोई आम सवाल नहीं पूछे जाते हैं। संध्या वंदन कैसे होता है? मंत्र कैसे बोले जाते हैं? पूजा की पूरी विधि क्या है? रामजी की खास पूजा-पद्धति में क्या नियम हैं? इन सब पर बारीकी से सवाल होते हैं। पैनल सिर्फ ज्ञान नहीं, उम्मीदवार का व्यवहार और संस्कार भी देखता है।
इंटरव्यू पास कर लिया तो भी सीधे नौकरी नहीं मिलती
इंटरव्यू पास करने के बाद भी सीधे ड्यूटी पर नहीं लगाया जाता है। चुने गए उम्मीदवारों को छह महीने की रेजिडेंशियल ट्रेनिंग दी जाती है, यानी इस दौरान वो मंदिर परिसर में ही रहते हैं। रहना-खाना पूरी तरह फ्री होता है, ऊपर से हर महीने 2,000 रुपए जेब खर्च के तौर पर भी मिलते हैं। ट्रेनिंग का सिलेबस खुद बड़े संतों ने तैयार किया है। ट्रेनिंग खत्म होने पर ही पोस्टिंग मिलती है। जो लोग आखिरी लिस्ट में जगह नहीं बना पाते, उन्हें भी निराश नहीं किया जाता, उन्हें सर्टिफिकेट दे दिया जाता है, ताकि आगे जब भी सीट खाली हो, उन्हें पहले मौका मिले।
राम मंदिर के पुजारियों को कितनी सैलरी मिलती है
मुख्य पुजारी: करीब 38,500 रुपए महीना
सहायक पुजारी: 33,000 से 36,000 रुपए महीना
सुविधाएं: रहना-खाना, मेडिकल सुविधा और हफ्ते में एक दिन की छुट्टी
क्या मंदिर में सिर्फ पुजारी ही भर्ती होते हैं?
राम मंदिर परिसर केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। वहां भारी निर्माण काम, टेक्निकल मेंटेनेंस और मैनेजमेंट का पूरा सिस्टम चलता है और इसके लिए नियमित तौर पर प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ती है। हाल ही में ट्रस्ट से जुड़े 'अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय' के लिए इंजीनियर पदों पर भर्ती निकली थी। यह भर्ती दो साल के कॉन्ट्रैक्ट पर थी, जिसे काम अच्छा रहने पर बढ़ाया भी जा सकता है। डिग्री या डिप्लोमा वाले उम्मीदवार इसके लिए योग्य माने गए और सैलरी 35,000 से 40,000 रुपए महीना तक रखी गई, जो उम्मीदवार की योग्यता पर निर्भर करती है।
मैनेजमेंट और सिक्योरिटी स्टाफ की भी होती है भर्ती
मंदिर के स्टोर, भंडार और रोजमर्रा की व्यवस्था संभालने के लिए कोठारी, भंडारी और स्टोर मैनेजर जैसे पद होते हैं, जिन्हें 19,000 से 24,000 रुपए महीना सैलरी मिलती है। चढ़ावे की गिनती और वेरिफिकेशन का काम प्राइवेट एजेंसियों या कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ के जरिए होता है, जिनकी सैलरी लगभग 20,000 रुपए महीना है।


