'हेनली ऑपर्च्युनिटी इंडेक्स 2026' के अनुसार, बेहतर करियर और जीवनशैली के लिए स्विट्जरलैंड दुनिया का नंबर 1 देश है। इस सूची में सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन भी शीर्ष पर हैं। रिपोर्ट में भारत का स्कोर 39 है, जो अवसरों में कमी दर्शाता है।

जो स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स विदेश जाकर पढ़ाई करने और करियर बनाने का सपना देखते हैं, उनके लिए एक नई रिपोर्ट बड़े काम की है। यह रिपोर्ट बताती है कि अच्छी सैलरी, करियर में तरक्की और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए कौन से देश सबसे अच्छे हैं। 'हेनली ऑपर्च्युनिटी इंडेक्स 2026' के मुताबिक, इस लिस्ट में स्विट्जरलैंड दुनिया में नंबर वन है। पहले लोग सिर्फ वीजा मिलने की आसानी देखकर देश चुनते थे, लेकिन अब अच्छी कमाई और लंबे समय की फाइनेंशियल सिक्योरिटी पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं।

ये हैं टॉप पर रहने वाले देश

ज्यादा सैलरी, बेहतरीन यूनिवर्सिटी और नौकरी के मौकों के मामले में टॉप 5 देश ये हैं:

स्विट्जरलैंड: यह देश 100 में से 86 पॉइंट के साथ पहले नंबर पर है। यहां बैंकिंग और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में शानदार मौके हैं, जो इसे सबका पसंदीदा बनाते हैं।

सिंगापुर: यह एशिया में इन्वेस्टमेंट और बिजनेस का बड़ा सेंटर है, इसलिए इसे दूसरा स्थान मिला है।

ऑस्ट्रेलिया: टॉप यूनिवर्सिटी और हाई क्वालिटी लाइफस्टाइल की वजह से ऑस्ट्रेलिया तीसरे नंबर पर है।

अमेरिका और ब्रिटेन: दोनों देश चौथे नंबर पर हैं। हालांकि, सैलरी के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है (स्कोर: 100)।

कनाडा: दूसरे देशों से आने वाले कर्मचारियों का स्वागत करने की अपनी पॉलिसी के चलते कनाडा पांचवें स्थान पर है।

लिस्ट में शामिल दूसरे बड़े देश

टॉप 15 में जगह बनाने वाले कुछ और देश इस तरह हैं:

यूएई (7वां स्थान): दुबई और अबू धाबी नए बिजनेसमैन और टैलेंटेड लोगों के लिए एक बेहतरीन जगह है।

ऑस्ट्रिया (6), न्यूजीलैंड (8), हॉन्ग कॉन्ग और इटली (9), लातविया और माल्टा (10), पुर्तगाल (11), और ग्रीस (12)।

भारत और दूसरे देशों में कितना फर्क?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का कुल 'ऑपर्च्युनिटी स्कोर' सिर्फ 39 है, जबकि अमेरिका का स्कोर 79 है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में आर्थिक तरक्की तो हो रही है, लेकिन टॉप यूनिवर्सिटी, विदेशी निवेश और नौकरी के मौकों के मामले में अमेरिका हमसे बहुत आगे है।

सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं, वीजा भी जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ हार्वर्ड या ऑक्सफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़ लेना ही काफी नहीं है। आपकी पढ़ाई पर किया गया खर्च तभी वसूल होगा, जब आपको उस देश में पढ़ाई के बाद काम करने और रहने की इजाजत भी मिले। उदाहरण के लिए, जो भारतीय परिवार अमेरिकन इन्वेस्टमेंट वीजा के जरिए ग्रीन कार्ड ले लेते हैं, उनके बच्चों के लिए पढ़ाई के बाद वहीं नौकरी ढूंढना आसान हो जाता है।