एक कैंडिडेट ने 1 लाख की सैलरी पर 1.2 लाख का ऑफर ठुकरा दिया। कंपनी के कल्चर और सुविधाओं के वादों के बावजूद, वह अपनी कीमत पर अड़ा रहा। अंततः उसे दूसरी कंपनी से 1.8 लाख का बेहतर ऑफर मिला, जो अपनी वैल्यू पहचानने का सबक है।
नई नौकरी ज्वाइन करते समय या पुरानी नौकरी बदलते समय हम सैलरी पर कैसे मोलभाव करते हैं, यह हमारे पूरे करियर की वैल्यू तय कर सकता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक शख्स की कहानी कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बन गई है। यह घटना बताती है कि यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं, बल्कि हर कर्मचारी के आत्म-सम्मान और वैल्यू का भी सवाल है।
क्या है पूरा मामला?
साइमन इंगारी नाम के एक यूजर ने 'X' (पहले ट्विटर) पर यह कहानी शेयर की। इसके मुताबिक, एक कैंडिडेट की मौजूदा सैलरी 1 लाख रुपये महीना थी। उसे एक नामी कंपनी से 1।2 लाख रुपये महीने का ऑफर मिला। आमतौर पर 20% की बढ़ोतरी देखकर कोई भी इस ऑफर को तुरंत स्वीकार कर लेता। लेकिन इस कैंडिडेट ने अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा दिखाते हुए इस ऑफर को हिम्मत से ठुकरा दिया। यह कई लोगों के लिए हैरानी की बात थी, लेकिन उसे अपनी वैल्यू का साफ अंदाजा था।
हायरिंग टीम ने कैंडिडेट को कम सैलरी पर रखने के लिए कई तरकीबें अपनाईं। उन्होंने कहा, "हमारी कंपनी का वर्क कल्चर बहुत अच्छा है, कर्मचारियों को फ्री इंश्योरेंस, जिम और मनोरंजन जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं। भविष्य में आपकी तरक्की भी खूब होगी।" लेकिन कैंडिडेट अपने फैसले से जरा भी नहीं हिला। जब कंपनी ने भविष्य में ग्रोथ का भरोसा दिलाया, तो कैंडिडेट ने बहुत पते की बात कही: "इज्जत और वैल्यू सिर्फ बातों से या ऑफिस की फ्री कॉफी से नहीं मिलती, वो हर महीने मिलने वाली सैलरी में दिखनी चाहिए।"
बड़ी जीत और लोगों का रिएक्शन
खास बात यह है कि पहली कंपनी लगभग तीन महीने तक उसे मनाने की कोशिश करती रही। लेकिन उस कैंडिडेट ने समय बर्बाद नहीं किया और दूसरी जगहों पर इंटरव्यू देना जारी रखा। आखिरकार, उसे एक दूसरी कंपनी से 1।8 लाख रुपये महीने का जबरदस्त ऑफर मिला! यह पहले ऑफर से पूरे 50% ज्यादा था और उसकी काबिलियत को मिला असली सम्मान था।
इस पोस्ट पर लोगों ने मजेदार कमेंट्स किए हैं। कुछ ने सीधे तौर पर लिखा, "ऑफिस में मिलने वाले 'फ्री स्नैक्स' या 'ग्रेट कल्चर' जैसी बातें अक्सर ज्यादा काम के बोझ को छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।" इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि "हमेशा अपनी कीमत पहचानें और सिर्फ वादों के लिए अपनी काबिलियत से कम सैलरी पर कभी समझौता न करें।" यह हर नौकरीपेशा इंसान के लिए एक बड़ा सबक है।
