IITs 22 Companies Ban: 150 से ज्यादा जॉब ऑफर का मामला सामने आने के बाद IITs ने 22 कंपनियों पर 2 साल की कैंपस हायरिंग रोक लगा दी। जानें पूरा मामला और वजह।
IIT Campus Placement: कैंपस प्लेसमेंट में नौकरी का ऑफर मिलने के बाद उसे वापस लेना अब कंपनियों के लिए महंगा पड़ सकता है। 2026 बैच के छात्रों को दिए गए 150 से ज्यादा जॉब ऑफर पर विवाद के बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) ने 22 कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। इन कंपनियों के साथ अगले दो प्लेसमेंट सीजन में सहयोग नहीं किया जाएगा।
23 IITs में 150 से ज्यादा ऑफर प्रभावित
यह फैसला All IITs Placement Committee (AIPC) की बैठक में लिया गया। समिति ने कंपनियों के नाम पर औपचारिक रूप से ‘ब्लैकलिस्ट’ शब्द इस्तेमाल करने के बजाय इसे ‘नॉन-कोऑपरेशन’ कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 23 IITs में 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के 150 से ज्यादा ऑफर कंपनियों की ओर से वापस लिए गए या जॉइनिंग नहीं दी गई। कुछ कंपनियों ने 10 से 15 तक ऑफर वापस लिए। AIPC की ओर से इन कंपनियों को 30 सितंबर तक औपचारिक सूचना भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रभावित ऑफरों की अंतिम संख्या अभी अलग-अलग IITs से मिलने वाली जानकारी के आधार पर तय की जा रही है।
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Oracle के करीब 40 ऑफर का दावा
रिपोर्टों के मुताबिक, Oracle भी उन कंपनियों में शामिल है जिनके खिलाफ दो साल तक नॉन-कोऑपरेशन का फैसला लिया जा सकता है। कैंपस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि Oracle ने अलग-अलग IITs में करीब 40 जॉब ऑफर को जॉइनिंग नहीं दी।। कंपनी की ओर से इस मामले पर मांगी गई प्रतिक्रिया की रिपोर्टिंग में पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
कैंपस प्लेसमेंट खासकर फ्रेशर्स के लिए नौकरी पाने का अहम जरिया होता है। ऐसे में ऑफर मिलने के बाद उसके रद्द होने से छात्र की नौकरी की योजना और आगे की तैयारी दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से IITs के प्लेसमेंट कार्यालय प्रभावित छात्रों के रिज्यूमे दूसरे रिक्रूटर्स तक पहुंचाने और वैकल्पिक अवसर तलाशने में मदद कर रहे हैं।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब टेक कंपनियां एंट्री-लेवल हायरिंग को लेकर सावधानी बरत रही हैं। इसलिए इस मामले का असर सिर्फ 22 कंपनियों तक सीमित नहीं, बल्कि कैंपस हायरिंग में ऑफर की विश्वसनीयता और कंपनियों-छात्रों के बीच भरोसे की बहस पर भी पड़ सकता है।
