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UPSC Success Story:शिशु मंदिर से पढ़ाई, अंग्रेजी नहीं आती, UPSC 2020 क्रैक करने वाले वैभव ऐसे होते थे मोटिवेट

वैभव जिंदल (Vaibhav Jindal) ने  की UPSC 2020 में 253वीं रैंक आयी है। उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैटगरी मिलने की उम्मीद है। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले वैभव की सफलता का सफर संघर्षों से भरा रहा। 

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New Delhi, First Published Nov 3, 2021, 7:42 PM IST
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करियर डेस्क. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा क्वालीफाई कर वैभव जिंदल (Vaibhav Jindal) ने  की UPSC 2020 में 253वीं रैंक आयी है। उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैटगरी मिलने की उम्मीद है। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले वैभव की सफलता का सफर संघर्षों से भरा रहा। वैभव ने सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई कांसाबेल स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से पूरी की। 8 से 10वीं तक उन्होंने रायपुर के बोर्डिंग स्कूल में पूरी की। 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई कानपुर स्थित जेके स्कूल से कॉमर्स विषय में की। 2015 में सीबीएसई बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में 98.2 फीसदी अंक के साथ कॉमर्स के टॉपर थे। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली से ग्रेजुएशन किया और ग्रेजुएशन का अंतिम वर्ष पूरा होते ही उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में भी हाथ आजमाया। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) के नतीजे 24 सितंबर, 2021 को जारी किए गए। फाइनल रिजल्ट (Final Result) में कुल 761 कैंडिडेट्स को चुना गया। Asianetnews Hindi संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) में सिलेक्ट हुए 100 कैंडिडेट्स की सक्सेज जर्नी (Success Journey) पर एक सीरीज चला रहा है। इसी कड़ी में हमने वैभव से बातचीत की। आइए जानते हैं UPSC की तैयारी के दौरान किस तरह से मोटिवेट किया। 
 
उम्मीदों को याद कर होते थे मोटिवेट
वैभव का कहना है कि सफलता मेरी पहचान से जुड़ी थी। स्कूल से लेकर कॉलेज तक मैंने कभी असफलता नहीं देखी थी। जब वह अपने गांव से निकलते थे तो पूरा गांव उन्हें देखता था कि यह लड़का कुछ बनकर आएगा। उनका कहना है कि यदि वह असफल हो जाते तो उनके गांव व परिवार के छोटे बच्चे सपना देखना ही छोड़ देते। वह कहते कि जब स्कूल, कॉलेज में इतना सफल व्यक्ति कुछ नहीं कर पाया तो हम लोग कैसे कर पाएंगे। वह उन्हें हतोत्साहित नहीं कर सकते थे। उनका परिवार चाहता था कि वह कुछ अच्छा करें, अच्छा पद प्राप्त करें। वह जब उनकी उम्मीदों को याद करते थे तो वह हमेशा उनको मोटिवेट होने में सहायता करती थी।

कोचिंग में काम कर बढ़ा आत्मविश्वास
वैभव कहते हैं कि दूसरे अटेम्पट में जब वह प्रीलिम्स में भी असफल रहें तो उस समय काफी निराश हुए थे कि अब क्या होगा? उस समय उन्होंने एक कोचिंग में कुछ दिन काम किया। वहां वह कापियां चेक करते थे। तब उन्हें लगा कि नहीं वह सफल हो सकते हैं। उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा उस काम से उनकी कुछ कमाई हुई जो उनके काम आई।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी ही मानसिक और शारीरिक स्तर पर ट्रेनिंग
वैभव का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा की तैयारी अपने आप में एक लर्निंग अनुभव है। तैयारी ही मानसिक और शारीरिक स्तर पर ट्रेनिंग है। आदमी एक सही आफिसर इसी जर्नी में ही बन पाता है। उनका कहना है कि जब आप कई बार असफलता का सामना करते हैं। तब आपको पता चलता है कि आपको कैसे लोगों से जुड़ना चाहिए। जिनसे आप अपनी बात शेयर कर सकें, जिससे आपका मानसिक तनाव कम हो। जब पहले अटेम्पट में उनका मेंस क्लियर नहीं हुआ और दूसरे अटेम्पट में उनका प्रीलिम्स तक क्लियर नहीं हुआ, तब उन्होंने जीवन में पहली बार असफलता का सामना किया था तब उन्हें यह एहसास हुआ था।

नहीं करें अपनी काबिलियत का मूल्यांकन
उनका कहना है कि यूपीएससी में कई चीजें आपकी नियंत्रण में नहीं होती है। यहां भाग्य और अन्य फैक्टर (कारकों) का बड़ा महत्व होता है। इस बार वैकल्पिक विषय में कॉमर्स में उच्चतम अंक 67 तक गए। जबकि बाकी विषयों के अंक 320 के आस पास तक गएं। यह सब चीजें आपके नियंत्रण में नहीं है लेकिन असफलता मिलने पर अपनी काबिलियत का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए।

अंग्रेजी नहीं आती थी तो लगता था अटपटा
वैभव कहते हैं कि वह छोटी जगह से आते हैं। उनकी शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर में हुई थी तो शुरूआती दिनों में उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। जब वह अपने घर से बाहर निकले तो उन्हें यह अटपटा लगता था कि जब वह साधारण सी बात को अच्छे से नहीं कह पाते थे। उन्होंने अलग-अलग जगह पढ़ाई की तो वहां की स्थितियों के हिसाब से एडजस्ट करना काफी कठिन लगता था। ऊपर से बाहर पढ़ाई करने का खर्च भी काफी ज्यादा होता है तो उन्होंने उसे व्यवस्थित करके पढ़ाई जारी रखी। कई बार रिश्तेदार भी उनकी मदद करते थे तो वह उसकी जवाबदेही भी महसूस करते थे। उसका अपने उपर दबाव महसूस करते थे। तैयारी के दौरान साल में दो से चार दिन ही अपने घर जा पाते थे। घर वालों ने मिलना नहीं हो पाता था।

जो भी करें अपनी दृष्टिकोण से करें
उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं की बहुत जगह बहुत ज्याद इनवाल्वमेंट (भागीदारी) नहीं होनी चाहिए। यदि उनकी फ्रेंड सर्किल ज्यादा रहेगी तो कमिटमेंट ज्यादा बढेंगे। बहुत ज्यादा मैटेरियल फॉलो नहीं करें। स्रोत सीमित रखें और उसे बार बार रिवाइज करें। वैसे अगर आप देखेंगे तो यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हैं तो आपको लाखों राय मिल जाएगी कि कैसे तैयारी करनी है। जो भी करें अपनी दृष्टिकोण का इस्तेमाल कर करें। कई बार कई लोगों के कई सुझाव होते हैं तो हम कन्फयूज हो जाते हैं। क्या करें और क्या नहीं करें? उससे बचें।

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