Job Seeker Viral DM: बेंगलुरु स्टार्टअप मैनलिच के संस्थापक प्रीतम कुदेव को एक 22 वर्षीय डेवलपर ने LinkedIn पर वेबसाइट की कड़ी आलोचना करते हुए उनसे नौकरी की उम्मीद जताई। जिसके बाद फाउंड ने जो जवाब दिया उससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। जानिए पूरा मामला।
LinkedIn Viral Message: नौकरी पाने के लिए लिंक्डइन पर किसी कंपनी के फाउंडर को सीधे मैसेज करना अब नया नहीं है। लेकिन एक 22 वर्षीय महिला डेवलपर का संपर्क मैसेज (Outreach Message) इन दिनों चर्चा में है। नौकरी की तलाश कर रही इस डेवलपर ने बेंगलुरु के पुरुषों के पर्सनल केयर ब्रांड मैनलिच (Mannlich) के फाउंडर प्रीतम कुदेव को मैसेज भेजकर कंपनी की वेबसाइट की जमकर आलोचना की। दिलचस्प बात यह रही कि वेबसाइट की कमियां गिनाने के बाद उसने खुद ही उसे बेहतर बनाने के लिए काम करने की पेशकश भी कर दी।
‘वेबसाइट देखकर क्रिंज हुआ’
LinkedIn पर भेजे गए मैसेज में डेवलपर ने कहा कि उसने Mannlich की वेबसाइट और उसके प्रोडक्ट्स देखे, लेकिन वेबसाइट का अनुभव उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया। उसने साइट को “very repelling and borderline disgusting” तक कह दिया। उसके मुताबिक वेबसाइट पर प्रोडक्ट को पेश करने के बजाय शर्टलेस पुरुषों और पुरुष मॉडल्स की तस्वीरों पर जरूरत से ज्यादा फोकस नजर आता है। उसने यह भी कहा कि पुरुषों के लिए स्किनकेयर का आइडिया उसे पसंद है, लेकिन मौजूदा वेबसाइट देखकर वह अपने पिता के लिए वहां से दोबारा खरीदारी करना पसंद नहीं करेगी। डेवलपर ने वेबसाइट को ज्यादा Simple, Gender-Friendly और Welcoming बनाने की सलाह दी। उसने यह भी दावा किया कि वेबसाइट की स्पीड उसे धीमी लगी। खुद को डेवलपर बताते हुए उसने कहा कि अगर कंपनी चाहे तो वह इस समस्या को ठीक करने में मदद कर सकती है।
फाउंडर ने बताया वेबसाइट का असली मकसद
मैनलिच के संस्थापक और सीईओ प्रीतम कुदेव ने इस मैसेज का जवाब देते हुए कहा कि वेबसाइट किसी सामान्य ऑडियंस को आकर्षित करने के लिए नहीं बनाई गई है। उनका कहना था कि इसे एक खास तरह के कस्टमर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और ऐसे लोगों को “repel” करना भी डिजाइन रणनीति का हिस्सा है, जिन्हें कंपनी अपना टारगेट कस्टमर नहीं मानती। इसके बाद Kudev ने LinkedIn पर पूरी बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने नौकरी के लिए युवाओं को सिखाए जा रहे आउटरीच टेम्प्लेट पर व्यंग्य करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसे टेम्प्लेट्स कौन सिखा रहा है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-
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नौकरी का मौका भी दिया, लेकिन एक शर्त के साथ
पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ यह रहा कि आलोचना के बावजूद कुदेव ने अपनी कंपनी में संभावित उम्मीदवारों के लिए दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने मार्केटिंग, कंटेंट और ऑपरेशन्स में अवसर तलाश रहे लोगों से अपना पोर्टफोलियो शेयर करने को कहा। हालांकि उनकी शर्त भी साफ थी कि उम्मीदवार को कंपनी की वेबसाइट से “repelled” नहीं होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो खेमों में नजर आए। कुछ लोगों ने डेवलपर के लहजे को गैर-पेशेवर और जरूरत से ज्यादा आक्रामक बताया। उनका सवाल था कि नौकरी मांगते समय किसी कंपनी के फाउंडर को इस तरह सार्वजनिक रूप से आलोचना करना क्या सही outreach strategy है।
दूसरी तरफ, कुछ यूजर्स ने कहा कि भाषा भले ही तीखी थी, लेकिन वेबसाइट के डिजाइन और यूजर एक्सपीरिएंस को लेकर उठाए गए सवालों पर चर्चा होनी चाहिए। कुछ लोगों ने खुद वेबसाइट का अनुभव खराब होने की बात भी कही। आखिरकार यह मामला सिर्फ एक LinkedIn DM तक सीमित नहीं रहा। इसने नौकरी के लिए संपर्क, प्रोफेशनल बातचीत और स्टार्टअप ब्रांडिंग के बीच की उस महीन रेखा पर बहस छेड़ दी है, जहां बेबाक फीडबैक कब ध्यान खींचने वाली स्ट्रेटजी बन जाए, कहना मुश्किल है।
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